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दंगा पीड़ितों को शर्त पर मिलेगा मुआवजा

Tue, 12 Nov 2013 12:09 PM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
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मुजफ्फरनगर दंगे में बेघर हुए लोगों को पुनर्वास के लिए सरकार से पांच लाख रुपये की सहायता लेने से पहले यह लिखकर देना होगा कि वे न राहत कैंप में रहना चाहते हैं और न ही वापस अपने गांव जाना चाहते हैं।
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प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि सरकारी धन का दुरुपयोग रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

असल में यह चर्चा आम हो गई थी कि जिला प्रशासन राहत कैंपों में रह रहे लोगों को चेक देने से पहले जबरन शपथ पत्र ले रहा है।

इस मामले में प्रमुख सचिव गृह ने कहा कि किसी तरह की जबर्दस्ती नहीं की जा रही है।

उन्होंने बताया कि दंगे में बेघर हुए लोगों के बारे में सहारनपुर के मंडलायुक्त व जिलाधिकारी ने रिपोर्ट दी थी कि नौ गांवों के लगभग 1800 परिवार अपने गांव वापस नहीं जाना चाहते हैं।

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ऐसे में सरकार के पास दो रास्ते थे। या तो जमीन अधिगृहीत कर ऐसे लोगों की मदद की जाती या फिर उन्हें एकमुश्त राहत राशि दे दी जाती, जिससे वे अपने मन मुताबिक इंतजाम कर सकें।
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कैबिनेट ने भी यही फैसला किया था कि ऐसे पीड़ितों को प्रति परिवार के हिसाब से पांच लाख रुपये की सहायता मुहैया कराई जाए।

ऐसे लोगों से ही शपथ पत्र लिया जा रहा है कि वे न राहत कैंप में रहना चाहते हैं, न ही अपने गांव वापस जाने के इच्छुक हैं। वे अपने मन मुताबिक नई जगह पर बसना चाहते हैं।

गृह विभाग के कुछ अन्य अधिकारियों का कहना था कि अगर कोई पांच लाख रुपये का चेक भी ले ले और राहत कैंप में ही रहे, या चेक लेने के बाद दुबारा अपने गांव में जा बसे तो इससे पीड़ितों के पुनर्वास का पूरा उद्देश्य ही खत्म हो जाता।
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ऐसे में सरकारी धन का सही उपयोग हो, इसी वजह से शपथ पत्र लिए जा रहे हैं।

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