एसआईआर के लिए हर विधानसभा में एईआरओ तैनात किए गए हैं। लेकिन, विपक्ष क्षेत्रवार इनकी संख्या पर सवाल उठा रहा है। आरोप है कि सपा की आधार वाली सीटों पर ज्यादा संख्या में तैनात किए गए हैं। आगे पढ़ें पूरा मामला...
उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग ने हर विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर के लिए सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ) की तैनाती कर दी है। ये निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) का सहयोग करेंगे। इन्हें भी ईआरओ के समान अधिकार दिए गए हैं। लेकिन, विधानसभावार एईआरओ की संख्या में अंतर को लेकर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं।
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उदाहरण के तौर पर मेरठ के कैंट विधानसभा क्षेत्र में 63 और दक्षिणी सीट पर 69 एईआरओ लगाए गए हैं, जबकि चंदौली के सैय्यद राजा विधानसभा क्षेत्र में 4 ईआरओ हैं। इन तीनों ही सीटों पर वर्तमान में भाजपा के विधायक हैं। इसी तरह संभल के गुन्नौर क्षेत्र में 51 ईआरओ लगाए गए हैं, जबकि शामली के कैराना में 6 ईआरओ लगाए गए हैं। ये दोनों ही सीटें सपा के पास हैं।
एसआईआर का काम देख रहे सपा के पदाधिकारियों का कहना है कि सपा की आधार वाली सीटों पर ज्यादा एईआरओ लगाए गए हैं। हालांकि, आंकड़े इसकी पुष्टि नहीं करते। मेरठ की कैंट व दक्षिणी सीट और चंदौली की सैय्यद राजा सीट न तो मुस्लिम बहुल हैं और न ही सपा के पास हैं, फिर भी दो क्षेत्रों में ईआरओ ज्यादा हैं और तीसरे में उनसे कहीं कम।
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कैराना मुस्लिम बहुल होते हुए भी वहां 6 ईआरओ ही लगाए गए हैं। इस बारे में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा का कहना है कि एसआईआर में दिए जाने वाले नोटिसों की संख्या को देखते हुए एईआरओ तैनात किए गए हैं।