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यूपी: आखिर क्यों मादक पदार्थों की गिरफ्त में जा रहे युवा, इस शोध से हुआ खुलासा; आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती..

Mon, 15 Dec 2025 06:29 PM IST
भूपेन्द्र सिंह सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

लखनऊ समेत देश के 10 बड़े शहरों के 5,920 छात्र-छात्राओं पर हुए अध्ययन में 15.1 % ने मादक पदार्थों के सेवन की बात मानी। मादक पदार्थों का सेवन कर चुके 40 फीसदी विद्यार्थियों के घरवाले  नशीली चीजों का सेवन कर रहे थे। इसमें तंबाकू और शराब का सेवन करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रही। 
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बच्चों में नशे की लत। (सांकेतिक)
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विस्तार
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बच्चे अपने बड़ों से अच्छी और बुरी दोनों आदतें सीखते हैं। तंबाकू, शराब और अन्य नशीली चीजों का सेवन करना भी वे बड़ों से सीख लेते हैं। लखनऊ समेत देश के 10 बड़े शहरों के छात्र-छात्राओं पर हुए अध्ययन में 15.1% ने नशीली चीजों के सेवन की बात स्वीकार की। इनमें से 40 फीसदी छात्र-छात्राओं के घरवाले मादक पदार्थों का सेवन कर रहे थे।

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यह संयुक्त अध्ययन किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के साथ ही देश के शीर्ष संस्थानों ने मिलकर किया। इसमें बेंगलूरू, चंडीगढ़, दिल्ली, डिब्रूगढ़, हैदराबाद, इंफाल, जम्मू, लखनऊ, मुंबई और रांची के स्कूलों को शामिल किया गया। हर शहर से तीन विद्यालयों (शहरी सरकारी, शहरी निजी और ग्रामीण विद्यालय) से 200-200 छात्र-छात्राओं को सर्वेक्षण में शामिल किया गया। 

ये विद्यार्थी 8वीं से 12वीं तक की कक्षा के थे। इनमें 52.4% छात्र और 47.6% छात्राएं थीं। नाम गोपनीय रखते हुए इनसे प्रश्नावली भरवाई गई जिसमें 15.1% ने जीवन में कम से कम एक बार, 10.3% ने पिछले वर्ष और 7.2% ने पिछले महीने नशीली चीजों के सेवन की बात स्वीकारी। मादक पदार्थों में सबसे ज्यादा प्रतिशत तंबाकू और शराब का था। इसके बाद भांग, गांजा, अफीम जैसे नशे भी शामिल थे। यह अध्ययन नेशनल मेडिकल जर्नल के ताजा अंक में प्रकाशित हुआ है।

घरेलू झगड़े भी विद्यार्थियों में नशे की वजह

अध्ययन में देखा गया कि 25.7% छात्र-छात्राओं ने अपने घरों में झगड़े होने की बात कही। ऐसे में यह आशंका भी जताई गई कि पारिवारिक विवाद भी उनके नशे की वजह थी। 95% छात्र-छात्राओं ने माना कि मादक पदार्थों की वजह से उनकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।

नाबालिगों को भी आसानी से मिल रहे मादक पदार्थ

46.3% विद्यार्थियों ने खुलासा किया कि नाबालिग होने के बावजूद उन्हें मादक पदार्थ आसानी से मिल जाते हैं। इनमें शराब, भांग, तंबाकू और अन्य मादक पदार्थ शामिल हैं।
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छात्राओं के मुकाबले छात्रों में आदत ज्यादा

अध्ययन में देखा गया कि कम से कम एक बार नशीली चीजों का सेवन करने में छात्राओं के मुकाबले छात्रों की संख्या ज्यादा थी। न्यूनतम एक बार नशा करने वालों में छात्रों की संख्या 16.3% और छात्राओं की 13.8% थी। यह भी देखा गया कि कक्षा के साथ ही नशा करने वालों का आंकड़ा भी बढ़ता गया।

अध्ययन में रहे शामिल

केजीएमयू के प्रणोब दलाल, एम्स नई दिल्ली की अंजू धवन, बिस्वदीप चटर्जी, रचना भार्गवा, पियाली मंडल, रविंद्र राव, अतुल अंबेकर, अश्वनी मिश्रा व आलोक अग्रवाल, राष्ट्रीय नशा मुक्ति उपचार केंद्र की अनीता चोपड़ा, असम मेडिकल कॉलेज (डिब्रूगढ़) के ध्रुब ज्योति भुयान, केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (रांची) के सीआरजे खेस, राजकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (चंडीगढ़) के अजीत सिदाना, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (बंगलूरू) के अरुण कंडासामी, भारतीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (हैदराबाद) के एम. उमाशंकर, क्षेत्रीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (मणिपुर) के आरके सिंह, जीएस मेडिकल कॉलेज और किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल (मुंबई) की शुभांगी पारकर, शेर-ए-कश्मीर चिकित्सा विज्ञान संस्थान (श्रीनगर) के अब्दुल वाहिद खान।

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