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Lucknow News: प्रशासनिक अफसर, कलाकार, उद्यमी व अन्य पेशेवर भी लविवि में पढ़ाएंगे

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लखनऊ विश्वविद्यालय
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लखनऊ। प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, पेशेवरों, शोधकर्ताओं, सिविल सेवकों, उद्यमियों, कलाकारों, विधि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और कुशल प्रैक्टिशनर्स को अब लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाने का मौका मिलेगा। विवि ने एडजंक्ट फैकल्टी और प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। विवि ने अपनी वेबसाइट पर वर्षभर चलने वाले रोलिंग विज्ञापन के माध्यम से यह पहल की है।
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एडजंक्ट फैकल्टी का पैनल शिक्षण, प्रशिक्षण, शोध और कौशल विकास के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, गैर-सरकारी संगठनों और सिविल सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। ये विशेषज्ञ पारंपरिक पाठ्यक्रमों, कौशल-आधारित कार्यक्रमों और शोध सहयोग में योगदान देंगे। उनका कार्यकाल छह माह से तीन वर्ष तक हो सकता है। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और यूजीसी दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। इसका लक्ष्य वास्तविक पेशेवर अनुभव को कक्षाओं तक लाना है।
कुलपति जेपी सैनी ने बताया कि विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन, उद्योग और समाज की आवश्यकताओं से जोड़ना है। यह पहल अनुभवी विशेषज्ञों की व्यावहारिक समझ को कक्षाओं तक लाएगी। ऐसे विशेषज्ञ जिनके पास कम से कम 15 वर्षों का पेशेवर अनुभव है और अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो, वे बिना औपचारिक शैक्षणिक योग्यता के भी आवेदन कर सकते हैं।
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ये विशेषज्ञ पाठ्यक्रम निर्माण, व्याख्यान और छात्र मार्गदर्शन में सहयोग करेंगे। एडजंक्ट फैकल्टी शिक्षण, प्रशिक्षण, शोध और उद्योग-अकादमिक संबंधों को मजबूत करने में सहायक होंगे। वे पीजी/पीएचडी. कोर्सवर्क, कार्यशालाओं और छात्र मार्गदर्शन में योगदान दे सकेंगे। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस पाठ्यक्रम निर्माण और नए कोर्स डिजाइन में मदद करेंगे। वे नवाचार और उद्यमिता के लिए छात्रों का मार्गदर्शन भी करेंगे। यह पहल विद्यार्थियों की रोजगारपरकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

एक वर्ष तक के लिए हो सकती है प्रारंभिक नियुक्ति
लविवि के प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के लिए उद्योग-वित्त पोषित, विश्वविद्यालय-वित्त पोषित और मानद जैसी श्रेणियां हैं। प्रारंभिक नियुक्ति एक वर्ष तक के लिए हो सकती है। इसे आवश्यकता और योगदान के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, अधिकतम अवधि चार वर्ष से अधिक नहीं होगी। इच्छुक विशेषज्ञ विस्तृत दिशा-निर्देशों के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट देख सकते हैं।
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