तहसील दिवस का आयोजन ठीक से न होने पर शासन ने इस पर कड़ा रूख दिखाते हुए अफसरों से जवाब मांगा है।
इस पर मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इलाहाबाद, आजमगढ़, वाराणसी व गोरखपुर सहित 11 जिलों के डीएम को शासन के निर्देशों की अवहेलना का जिम्मेदार मानते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है।
बताते चलें कि लोकसभा चुनाव के बाद 20 मई को पहला तहसील दिवस था। इस दिन एक इलेक्ट्रॉनिक चैनल ने 11 जिलों में तहसील दिवस का ठीक से आयोजन न होने और उसमें जिलाधिकारियों के उपस्थित न होने को लेकर खबर प्रसारित की थी।
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने इसे गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद, आजमगढ़, सोनभद्र, चंदौली, गौतमबुद्धनगर, गोरखपुर, कौशांबी, बुलंदशहर, मेरठ, वाराणसी व कानपुर नगर के जिलाधिकारियों को व्यक्तिगत पत्र लिखकर दो हफ्ते में स्पष्टीकरण देने को कहा है।
प्रमुख सचिव ने सभी डीएम को किया आगाह
उधर, प्रमुख सचिव राजस्व केएस अटोरिया ने तहसील दिवसों के प्रभावी अनुपालन के लिए अलग से शासनादेश जारी किया है।
उन्होंने कहा है कि शासन की जानकारी में आया है कि तहसील दिवसों के आयोजन को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
तहसील दिवसों में डीएम व जिलास्तरीय अधिकारी उपस्थित नहीं होते हैं। इससे जनता की समस्याओं का ठीक से निपटारा नहीं हो पाता है जिससे शासन की छवि धूमिल हो रही है।
अटोरिया ने सभी जिलाधिकारियों व मंडलायुक्तों को 16 मई 2012 के शासनादेश के अनुसार तहसील दिवसों का प्रभावी अनुपालन करने की हिदायत दी है।