लखनऊ। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर और युग प्रवर्तक 1008 भगवान श्री ऋषभदेव (आदिनाथ) का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव बृहस्पतिवार को राजधानी में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में मनाया गया। शहर के विभिन्न दिगंबर जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा और शोभायात्राओं के साथ भक्तों ने भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
गोमतीनगर के विशाल खंड स्थित जैन मंदिर में सुबह भगवान का विधिवत अभिषेक और पूजन किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने आदिनाथ प्रभु को चांदी के पालने में झुलाकर भक्तिभाव से आराधना की। मंदिर के मंत्री आलोक जैन ने बताया कि भगवान ऋषभदेव ने ही ‘कर्मभूमि’ की परंपरा की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी पुत्रियों ब्राह्मी और सुंदरी को अक्षर ज्ञान कराया, जिससे ब्राह्मी लिपि का उद्भव हुआ। इस अवसर पर गोमतीनगर महिला मंडल की अनीता, अर्चना, जूली, मनीषा, सपना, मोना, रश्मि, अल्पना, दीपिका और आरुषि जैन सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
वहीं डालीगंज स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर से महामंत्री रीतेश जैन के नेतृत्व में भगवान की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। डीजे और बैंड-बाजे की मधुर धुनों पर गूंजते भजनों के बीच श्रद्धालु नाचते-गाते चल रहे थे। पालकी यात्रा डालीगंज बाजार और पन्नालाल चौराहा होते हुए पुनः मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
इससे पहले मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ और आदिनाथ प्रभु का पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया गया। मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि कार्यक्रम के समापन पर अमरचंद जैन परिवार की ओर से वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जैन समाज के अध्यक्ष विकास जैन, कोषाध्यक्ष वीर कुमार जैन, अंकित, अंशुल, मनोज, अनिल और विमल जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव बृहस्पतिवार को राजधानी में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में
जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव बृहस्पतिवार को राजधानी में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में
जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव बृहस्पतिवार को राजधानी में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में
जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव बृहस्पतिवार को राजधानी में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में
जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव बृहस्पतिवार को राजधानी में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में