उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपराध के मामलों की विवेचना पर हो रही हीलाहवाली पर डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने विवेचना की गुणवत्ता के सुधार और पर्यवेक्षण को लेकर अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि जो विवेचक जानबूझकर विवेचना में देरी कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डीजीपी ने कहा कि समयबद्ध, त्रुटिविहीन और तथ्यपरक विवेचना के बाबत डीजीपी मुख्यालयों के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। ऐसे में न्यायालय के सामने असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। गंभीर अपराधों की समय पर विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत करना और पीड़ित को न्याय दिलाना विवेचना का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए विवेचना पूर्ण करने की समयसीमा भी निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि एसएसपी व एसपी यह सुनिश्चित करें कि विवेचक विवेचना में अनावश्यक देरी न करे। पर्यवेक्षणीय अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि कोई विवेचना अनावश्यक रूप से लंबित न रहे। मासिक अपराध गोष्ठी में एसएसपी व एसपी तय करें कि विवेचना समयबद्ध तरीके से न्यायालय में दाखिल की जाए।
सीसीटीएनएस में केस डायरी को ऑनलाइन भरे जाने और आरोप पत्र को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (2) के तहत ऑनलाइन फाइल किए जाने की व्यवस्था है। लिहाजा विवेचक ऑनलाइन केस डायरी भरें। विवेचनाओं में सुधार के लिए विवेचकों और पर्यवेक्षणीय अधिकारी के साथ कार्यशाला का आयोजन करें।