प्रवेश न देने वाले स्कूलों के खिलाफ शिकायतें दर्ज करने के बाद डीएम विशाख जी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इसे रखा जाएगा। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। इस बार आरटीई के तहत 18 हजार बच्चों का चयन किया गया है, लेकिन अभी तक आठ हजार बच्चों को ही प्रवेश मिला है।
राजधानी लखनऊ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश न देने पर निजी स्कूलों के खिलाफ अब कार्रवाई शुरू होगी। अमर उजाला में लगातार खबरें छपने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने सोमवार को एक कमेटी गठित की है। ये कमेटी मंगलवार से अभिभावकों की शिकायत दर्ज करेगी।
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दूसरी ओर स्कूल प्रबंधक अभिभावकों से पात्रता का प्रमाणपत्र मांग रहे हैं। नियम के मुताबिक, निजी स्कूल इस तरह का कोई प्रमाणपत्र नहीं मांग सकता है। इसकी कई शिकायतें बीएसए दफ्तर भी पहुंची हैं।
स्कूल नहीं ले सकते हैं किसी भी प्रकार का शुल्क
आरटीई के तहत चयनित बच्चे के अभिभावक से निजी स्कूल कोई भी शुल्क नहीं ले सकते हैं। अगर प्रवेश शुल्क निजी प्रबंधक मांगते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। अभिभावक कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि ये नियम आरटीई एक्ट में स्पष्ट है।
अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
किसी भी तरह के शुल्क की मांग निजी स्कूल की ओर से हो तो शिकायत करें।
जाति और आय प्रमाणपत्र स्कूल प्रबंधक नहीं मांग सकते हैं।
प्रवेश के लिए स्कूल की ओर से लौटाया नहीं जा सकता है।
यदि निजी स्कूल लौटाते हैं तो उसे कारण बताना होगा।
प्रवेश से इन्कार करने पर भी स्कूल प्रबंधन को कारण बताना होगा।
अभिभावकों की शिकायत दर्ज करने के लिए कमेटी मंगलवार से बैठेगी। इन शिकायतों को जिलाधिकारी की बैठक में रखा जाएगा। आरटीई में जो बच्चे चयनित हुए हैं उनका प्रवेश हर हाल में कराया जाएगा। -राम प्रवेश, बीएसए