रायबरेली। शासन की तरफ से भले ही एक रुपये के परचे पर इलाज करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन मरीजों को दवाएं बाहर से ही खरीदनी पड़ रही हैं। अब जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को बाजार की दवाएं और जांचें लिखने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई होगी। सीएमएस ने पत्र जारी कर सभी चिकित्सकों पर शिकंजा कसा है। इमरजेंसी में बाजार की दवा लिखी गई तो इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर जिम्मेदार होंगे।
जिला अस्पताल में इलाज व जांच की सुविधाएं मौजूद हैं। यहां पर फ्री डायलिसिस, डिजिटल एक्सरे, पैथालॉजी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि की सुविधा है। रोजाना डेढ़ हजार से अधिक मरीज जिला अस्पताल इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। मरीज एक रुपये का पर्चा लेकर जब चिकित्सक के पास जाते हैं तो उन्हें सादे कागज पर बाहर की महंगी दवाएं लिख दी जाती हैं।
ऐसे में दवा खरीदने में मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। हाल यह है कि इमरजेंसी में भी बाजार से इंजेक्शन खरीदने के लिए परची थमा दी जा रही है। मामले में कई शिकायतें मिलने के बाद सोमवार को सीएमएस ने सभी चिकित्सकों के साथ ही इमरजेंसी के अधिकारियों को पत्र जारी किया है। आदेश दिया है कि मरीजों को बाजार से खरीदने के लिए दवा नहीं लिखी जाएगी। सभी जांचे भी अस्पताल में ही फ्री कराई जाएंगी।
सीएमएस डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि इमरजेंसी व ओपीडी के चिकित्सकों को पत्र जारी करके मरीजों को बाजार से दवाएं व जांच न लिखने के आदेश दिए गए हैं। इसके बाद भी बाजार की दवा लिखते पकड़े जाने पर संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होगी।