विधान परिषद में शून्य प्रहार के दौरान मुजफ्फरनगर में हुए दंगे पर कार्य स्थगन की सूचना दी गई।
बसपा, भाजपा व कांग्रेस सदस्यों ने परिषद की कार्यवाही रोक कर चर्चा कराने की मांग की।
सभापति गणेश शंकर पांडेय ने कार्य स्थगन को अस्वीकार कर मुजफ्फरनगर प्रकरण पर एक घंटे की चर्चा स्वीकार की है।
कार्य स्थगन की सूचना के दौरान विपक्षी सदस्यों ने स्टिंग ऑपरेशन में नाम आने वाले मंत्री पर कार्रवाई की मांग की। कहा कि सरकार स्टिंग ऑपरेशन को झूठा नहीं ठहरा सकती है।
मंत्री ने अगर पुलिस को कार्रवाई करने से रोका न होता तो शायद दंगा न होता। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी को सरकार की जांच पर विश्वास नहीं है, इसलिए इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए।
नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि राज्य सरकार ने सांप्रदायिक ताकतों के साथ मिलकर मुजफ्फरनगर की घटना को बढ़ाने का काम किया। सरकार मूकदर्शक बनी रही और खुफिया तंत्र पूरी तरह विफल।
मामूली छेड़छाड़ की घटना को थाने पर ही निपटाया जा सकता था, पर इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। पंचायतें होती रहीं और अफसर देखते रहे।
पंचायतों में आसपास जिलों के ही नहीं दूसरे प्रदेश के लोग भी शामिल हुए। फर्जी सीडी बनाकर बांटी गई जिसने आग में घी का काम किया।
मुजफ्फरनगर दंगा सोची समझी साजिश है। यह अफसोस की बात है कि सरकार का एक वरिष्ठ मंत्री कहता है कि जो हो रहा है उसे होने दो।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों को सदन में लाकर खड़ा करना चाहिए। चौथे स्तंभ पर गलत उंगली नहीं उठानी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष में कहा कि आईबी की रिपोर्ट है कि एक वरिष्ठ मंत्री के दबाव में दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई।
भाजपा नेता नेपाल सिंह व विनोद पांडेय ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पुलिस को अपंग बना दिया और जिसके चलते मुजफ्फरनगर में दंगा हुआ।
आरोप लगाया कि एक बड़े मंत्री के इशारे पर कवाल गांव की घटना के लिए जिम्मेदार सात आरोपियों को छोड़ा गया। अगर वे लोगों को नहीं छुड़ाते व पुलिस को निष्पक्ष काम करने दिया जाता तो यह दंगा नहीं होता।
उन्होंने भी सदन में काम रोककर चर्चा कराने की मांग की। कांग्रेस के नसीब पठान, दिनेश सिंह ने भी चर्चा की मांग की।