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...तो 'जनहित' में हटाए गए अरुण कुमार?

Fri, 27 Sep 2013 03:40 PM IST
विष्णु मोहन/लखनऊ
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एडीजी अरुण कुमार को पद से हटाने की वजह देर शाम सामने आ ही गई।
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मुजफ्फरनगर दंगे के बाद डैमेज कंट्रोल में जुटी प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगों में नाकामयाबी का ठीकरा एडीजी अरुण कुमार के सर फोड़ा है।

विशेष सचिव गृह एके मिश्र ने बृहस्पतिवार को कहा कि अरुण कुमार को हटाने का निर्णय जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

रेलवे के एडीजी मुकुल गोयल को सूबे का नया एडीजी लॉ एंड ऑर्डर बनाया गया है। अरुण कुमार को फिलहाल नई तैनाती न देते हुए डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

इस घोषणा के साथ ही नए एडीजी कानून-व्यवस्था ने पदभार ग्रहण भी कर लिया।

पिछली सपा सरकार के दौरान पुलिस विभाग में हुई भर्तियों में बरेली भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष रहे मुकुल गोयल के खिलाफ भर्ती अनियमितता के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था।
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बसपा सरकार अन्य आईपीएस अधिकारियों के साथ उन्हें भी निलंबित करना चाहती थी, पर प्रतिनियुक्ति पर होने की वजह से यह कार्यवाही नहीं हो सकी थी।

2002 में एमएलए निर्भयपाल की हत्या के मामले में एडीजी मुकुल गोयल को सहारनपुर के एसपी पद से निलंबित किया गया था।

मूल रूप से मुजफ्फरनगर के निवासी 1987 बैच के आईपीएस अफसर गोयल ने स्वीकार किया कि कवाल गांव की घटना में पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं कर सकी इसलिए इतनी ज्यादा हिंसा फैल गई।

कवाल की घटना को सही तरीके से टैकल नहीं किया गया। गोयल ने दावा किया कि अब ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

नए एडीजी के बोल
एडीजी गोयल ने कहा, चूंकि सांप्रदायिक संघर्ष गांवों में फैला है, जहां लोगों में अधिक भाईचारा रहता है। इसलिए वहां सद्भावना और भाईचारा बनाने का काम करना होगा। एडीजी ने कहा कि लापरवाही से काम करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।
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चुनौती पर
एडीजी गोयल ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती हालात को सामान्य बनाए रखने और तनाव को देखते हुए आगामी त्यौहारों को शांतिपूर्वक संपन्न कराने की है। कानून-व्यवस्था की दृष्टि से मौजूदा हालात काफी संवेदनशील हैं।

राजनीतिक दबाव पर
गोयल ने कहा कि जन प्रतिनिधियों की सिफारिशें तो हमेशा आती हैं। जरूरत है सही और कानून सम्मत कार्यवाही करने की। दबाव में आकर काम नहीं किया जाता है।
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