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केजीएमयू की आइसोलेशन-3 टीम का कमाल, 14 दिन में एक भी मौत नहीं, इन चुनौतियों का किया सामना

Thu, 06 Aug 2020 11:24 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आइसोलेशन तीन की टीम को सम्मानित भी किया गया। - फोटो : amar ujala
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केजीएमयू में कोरोना मरीजों के इलाज में लगी टीम के बीच ‘स्वस्थ’ प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। यह प्रतिस्पर्धा ज्यादा से ज्यादा मरीजों को ठीक कर घर भेजने की है। इसमें एसोसिएट प्रो. डॉ. मयंक के नेतृत्व में लगी आइसोलेशन तीन की टीम बाजी मारने में कामयाब रही है। इसके नेतृत्व में 14 दिन में आईसीयू में एक भी मरीज की मौत नहीं हुई।
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इस रिकॉर्ड प्रदर्शन पर टीम का सम्मान भी हुआ। केजीएमयू में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब पांच आइसोलेशन वार्ड चल रहे हैं। यहां करीब 200 मरीज भर्ती हैं। हर आइसोलेशन वार्ड के लिए 20 सदस्यीय टीमें हैं। एक टीम 14 दिन ड्यूटी करती है। इस बार आइसोलेशन वार्ड तीन में डॉ. मयंक के नेतृत्व में टीम लगी।

यहां 14 दिन मेें जहां एक भी मरीज की मौत नहीं हुई, वहीं 114 मरीज भर्ती किए गए और 111 डिस्चार्ज हुए। यह एक रिकॉर्ड है। गौरतलब है कि विभिन्न अस्पतालों से रेफर होकर आने वाले मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में लाया जाता है। यहां जो मरीज अति गंभीर होते हैं उन्हें जरूरत के हिसाब से आईसीयू में शिफ्ट किया जाता है। 
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मरीजों का बनाए रखा हौसला

डॉ. मयंक ने बताया कि जैसे किसी की हालत गंभीर हुई और दूसरे विभाग से सलाह लेने की जरूरत पड़ी तो ऐसा किया। कोरोना नोडल प्रभारी डॉ. डी हिमांशु, एमएस डॉ. बीके ओझा से परामर्श लिया। जिनकी स्थिति अत्यंत नाजुक हुई, उन्हें तत्काल आईसीयू भेजवाया। दोनों आईसीयू प्रभारियों से संपर्क बनाए रखे। दूसरी चुनौती थी कि जब तक आईसीयू में जगह नहीं है तब तक मरीज को स्थिर कैसे रखें। ऐसे में टीम के रेजिडेंट डॉक्टर लगातार आईसीयू की टीम व दूसरे विभागों के संपर्क में रहे। 

14 दिन के अंदर रक्षाबंधन सहित जो पर्व आए, उन्हें वार्ड में ही मिल-जुलकर मनाया गया। मरीजों का हौसला बढ़ाने को जरूरत पर परिजनों से उनकी बात भी कराई। मरीजों के हर सवाल के जवाब में समझाया कि उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं है। दवाओं से इसे नियंत्रित कर लिया गया है। ऐसे में मरीज चिंतामुक्त रहे और दवाएं लेने के साथ प्राणायाम सहित अन्य कसरत करते रहेे।
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खतरे भी उठाए

टीम अपनी जान जोखिम में भी डालने से भी पीछे नहीं रही। हर स्तर पर मरीजों के बीच घुले मिले रहे। सावधानी बरती, लेकिन वायरस से अछूते नहीं रहे। ड्यूटी खत्म होने के बाद जब जांच हुई तो एक वार्ड ब्वॉय व दो नर्सिंग कर्मी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इनका कहना था कि वे संक्रमित होने के बाद भी खुश हैं कि रिकॉर्ड मरीजों को ठीक कर घर भेजने में कामयाब रहे।

ये शामिल थे टीम में
डॉ. मयंक के साथ डॉ. नितिन यादव, डॉ. कृष्णा, डॉ. तनवीर, डॉ. इंदू, डॉ. स्तुति, डॉ. अभिषेक, डॉ. विनोद, डॉ. गुड्डू, नर्सिगकर्मियों में अतुल, योगेश, संजीव, विभा, मनोज, सुरेश, वार्डब्याय यासीर, मनोज, आदेश, विजय रानी, गीता, अनिल, सन्नी, अमन, नितिन आदि।

यहां हुईं मौतें
14 दिनों में केजीएमयू में 12 की मौत हुई, लेकिन ये मौतें आईसीयू व अन्य वार्डों में हुईं। सीएमएस प्रो एसएन शंखवार का कहना है कि इस टीम की तत्परता का नतीजा है कि आइसोलेशन वार्ड तीन में एक भी मौत नहीं हुई है। यह यूनिवर्सिटी के लिए मॉडल है। 
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