देशद्रोह और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के आरोप में आठ साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद पांच आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
एटीएस के विशेष न्यायाधीश एसएएच रिजवी ने शेख मुख्तार हुसैन, नौशाद उर्फ हाफिज उर्फ साबिर, नूर इस्लाम उर्फ मामा, मो. अली अकबर हुसैन व अजीजुर्रहमान उर्फ सरदार को रिहा करने का आदेश दिया।
नूर इस्लाम को छोड़कर सभी आरोपी देर शाम जेल से रिहा कर दिए गए। नूर इस्लाम को आतंक के एक अन्य मामले में निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की हुई है।
पांचों को बरी करने का आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने जो गवाह पेश किए, उनके बयानों में काफी भिन्नताएं हैं। यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि घटना किस प्रकार हुई। घटनास्थल के बारे में भी गवाहों के बयान अलग-अलग हैं।