प्रशांत ने एसआईटी को बताया कि घटना के बाद उसे थाना ले आया गया था। उसने पत्नी राखी को सूचना दी। कुछ देर बाद राखी उसके लिए कपड़े लेकर आई। उसने वर्दी उतारकर लोअर और टी-शर्ट पहनी और थाना परिसर में ही घूमता रहा। इस दौरान उसे किसी ने भी घूमने-फिरने पर नहीं रोका। थाना में ही उसे अपने गोली चलाने के मामले में विवेक की पूर्व सहकर्मी की तरफ से एफआईआर दर्ज कराने की बात पता चली।
हत्यारोपी सिपाही प्रशांत का कहना था कि पिस्टल से फायर होने के बाद उसने सबसे पहले गोमतीनगर थाना के इंस्पेक्टर डीपी तिवारी को फोन किया था। उन्होंने गोली चलने की बात सुनी तो कहा कि वह थाना पर नहीं हैं। नाइट अफसर को इस बारे में जानकारी दें। उसने नाइट अफसर को फोन कर पूरा वाकया बताया जिसके बाद मौके पर पुलिस फोर्स आ गई।
विवेक तिवारी हत्याकांड की एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी और एफआईआर की वादी उनकी पूर्व सहकर्मी ने बृहस्पतिवार दोपहर मजिस्ट्रेट के समक्ष कलमबंद बयान दर्ज कराया। सिविल जज अंजू कनौजिया ने बंद कमरे में करीब दो घंटे तक उनका बयान दर्ज किया। तीन दिन बाद पूर्व सहकर्मी के बयान की एक प्रति विवेचक को अवलोकन करने के लिए दी जाएगी।