अभय को शनिवार को जब जानकारी मिली कि बिजली वायरिंग ठेकेदार बाराबंकी गया है। छोटी बेटी बड़ी बहन के घर गई है। दोनों बेटे कोचिंग गए हैं। इसके एक-एक कर सभी को कॉल कर उनकी लोकेशन ली।
बड़े बेटे को फिल्म दिखाने के बहाने ले गया
क्षेत्राधिकारी गाजीपुर दीपक कुमार सिंह के मुताबिक अभय ओला कार चलाता है। उसको यह पता चला कि बड़ा बेटा घर पहुंच गया है। तो उसे कॉल कर फिल्म दिखाने के बहाने एसआरएस मॉल बुलाया। वहीं टिकट के लिए रुपये दिये। दोनों फिल्म देखने लगे।
फिल्म देखने के कुछ देर बाद अभय ने कहा कि ओला की बुकिंग आ गई है। कुछ देर में लौटेगा। मॉल से निकलने के बाद अभय कार की बुकिंग की दिशा में चला। अचानक उसने कार का जीपीएस बंद कर दिया, ताकि लोकेशन न मिले।
वह एक परिचित के घर के पास कार खड़ी, ताकि उसका नंबर सीसीटीवी की निगरानी में रहे, लेकिन कार में कौन है यह रिकार्ड न हो सके। वहां से बाइक ली। हेलमेट लगाकर सीमांतनगर पहुंचा। बाइक घर से कुछ दूर पर खड़ी की। घर के अंदर दाखिल हुआ।
वहां किरण से बातचीत के दौरान झगड़ा हुआ। उसने पहले केबिल वायर से गला घोंटा, इसके बाद सब्जी काटने वाले चाकू से गला रेत दिया। किरण की मौत होने के बाद अभय वहां से निकल गया। वह पड़ोसी का दीवार फांदकर बाहर आया। उसे पड़ोस की एक महिला ने देखा था। हालांकि हेलमेट के चलते पहचान नहीं सकी।
प्रभारी निरीक्षक रवींद्र नाथ राय के मुताबिक हत्या का राज सीसीटीवी फुटेज और ओला के लोकेशन ने खोला। हत्या के बाद घर पहुंची पुलिस ने करीबी लोगों से बातचीत करनी शुरू की। वहां भी अभय मौजूद था। उसने कई बातें पुलिस को बताई भी थी।
उसकी हरकत से पुलिस को संदेह हुआ। पुलिस ने अभय के पीछे सादी वर्दी में पुलिसकर्मी लगाया गया। पुलिस ने अभय के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाली। इसमें किरण वर्मा और उसके बातचीत के रिकार्ड मिले। पुलिस को एक संदिग्ध नंबर मिला।
जिस नंबर से अभय ने ओला की बुकिंग की थी। वहीं एक टीम उसके ओला कंपनी से संपर्क किया गया। वहां उसके रिकार्ड निकाले तो पता चला कि ओला कार का जीपीएस वारदात वाले दिन कुछ देर के लिए खराब हो गया था। इससे उस कार का लोकेशन नहीं मिल सका।
पुलिस ने बुकिंग रिकार्ड देखा तो वारदात के दिन उसने कुछ बुकिंग भी ली थी। पूरे रिकॉर्ड हासिल करने के बाद पुलिस ने सोमवार देर शाम को अभय को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस ने साक्ष्य उसके सामने रखे तो हत्या का राज खुल गया।