लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में अब ऐंठन, झुनझुनी, सुन्नता और कमजोरी जैसी समस्याओं का और बेहतर इलाज मिल सकेगा। इसके लिए संस्थान में ढाई करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रोमायोग्राफी (ईएमजी) मशीन आने वाली है। इस मशीन से नसों और मांसपेशियों की कमजोरी की सटीक जांच हो सकेगी।
इलेक्ट्रोमायोग्राफी (ईएमजी) एक डायग्नोस्टिक टेस्ट है जो व्यक्ति के कंकाल की मांसपेशियों और उन्हें नियंत्रित करने वाली नसों की जांच करता है। इसमें डॉक्टर मांसपेशियों के विकारों, तंत्रिका विकारों और नसों और मांसपेशियों के बीच संबंध को प्रभावित करने वाले विकारों का पता लगाते हैं।
इस जांच में परीक्षण की जाने वाली मांसपेशी में त्वचा के माध्यम से एक बहुत पतली विद्युत कंडक्टर वाली सुई डाली जाती है। यह सुई एक तार से कंप्यूटर से जुड़ी होती है। इसके बाद व्यक्ति को आराम करने और फिर परीक्षण की जा रही मांसपेशी को सिकोड़ने के लिए कहा जाता है। इस तरह से विद्युत कंडक्टर वाली सुई आराम और संचालन के दौरान मांसपेशी की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करती है।
इस तरह से मांसपेशी में किसी भी प्रकार की असामान्यता होने पर उसका पता लग जाता है। इसे कंप्यूटर पर रिकॉर्ड किया जाता है। पुनर्वास के दौरान डॉक्टर इस रिपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। उनको पता होता है कि मरीज के किस अंग में या मांसपेशी में कितनी समस्या है। इसके आधार पर उसकी फिजियोथेरेपी या फिर अन्य तकनीक से पुनर्वास करने का प्रयास किया जाता है। इस मशीन के आने से पुनर्वास में आसानी होगी।
बढ़ रही है मांग
पुनर्वास की जरूरत बेहद गंभीर रूप से घायलों के साथ ही लकवा या फिर अन्य किसी बीमारी की वजह से हाथ-पैर की मांसपेशियों के प्रभावित होने की दशा में किया जाता है। फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को देखते हुए संस्थान में इसकी खरीद हो रही है।