गाजियाबाद के मुरादनगर में श्मशान घाट की छत गिरने से 24 लोगों की मौत की घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अफसरों से बेहद नाराज हैं। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। मेरठ कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम व गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पांडेय से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। कमिश्नर व डीएम सहित कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
मुख्यमंत्री योगी मुरादनगर की घटना से व्यथित व नाराज हैं। सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में वह जमकर बरसे। उन्होंने घटना को अफसरों की गंभीर लापरवाही करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही अक्षम्य है। ऐसे अपराध करने वाले अफसरों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर मंडलीय समीक्षा बैठक में अफ सरों को साफ तौर पर निर्देशित किया गया था कि जिलों में हो रहे 50 लाख से अधिक की लागत के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच टास्क फोर्स गठित कर हर हाल में करवा लें। मुरादनगर की घटना अफ सरों की लापरवाही का परिणाम है।
मुरादनगर की घटना से साफ है कि फील्ड के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मुख्यमंत्री के निर्देशों को नजरंदाज करने की हिमाकत कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों के लिए मुख्यमंत्री का दो टूक संदेश सामने आया है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी के लहजे में यहां तक कहा कि इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार अफसरों के लिए शासन में कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री ने गाजियाबाद के जिलाधिकारी और मेरठ की मंडलायुक्त व अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच के संकेत भी दिए हैं।
50 लाख से अधिक लागत वाले सभी निर्माण कार्यों की जांच के फरमान
मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि प्रदेश भर में जहां भी निर्माण कार्य हो रहे हैं या हो चुके हैं उनकी गुणवत्ता की जांच कर अधिकारी रिपोर्ट भेजें। एक भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कमीं मिली तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिले के आला अधिकारियों की होगी। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि गाजियाबाद के मुरादनगर में रविवार दोपहर श्मशान घाट के प्रवेश द्वार के साथ बने गलियारे की छत गिरने की घटना में पुलिस ने ईओ निहारिका सिंह, जेई सीपी सिंह, सुपरवाइजर आशीष को गिरफ्तार कर लिया है। ठेकेदार अजय त्यागी समेत कुछ अन्य लोग फ रार हैं। आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, लोगों को खतरा पहुंचाना, व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाली चोट, धन का गबन, सरकारी कर्मचारी द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन व बुरी नीयत से कार्य जैसे आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है।