लखनऊ। लग्जरी एसी जनरथ बसों को सड़कों पर दौड़ना चाहिए। यात्रियों को सेवा देनी चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। अवध डिपो की 87 लग्जरी एसी जनरथ बसों में से 30 से 40 बसें रोजाना मरम्मत के अभाव में या ब्रेकडाउन के चलते सड़कों पर नहीं उतर रहीं। इससे प्रतिदिन चार हजार यात्रियों को दिक्कत हो रही है। इस लापरवाही का लाभ डग्गामार वाहन उठा रहे हैं। वे रोडवेज को राजस्व की चपत भी लगा रहे हैं।
रोडवेज के लखनऊ परिक्षेत्र के अंतर्गत अवध डिपो कैसरबाग में है। इस डिपो में 87 एसी जनरथ बसें हैं। बसों की मरम्मत का कार्य पहले विभाग खुद देख रहा था, लेकिन अब इसे निजी हाथों में सौंप दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि एसडीएल स्क्रैप वेंचर लिमिटेड कंपनी को बसों की मरम्मत का कार्य सौंपा गया है। निजी हाथों में सौंपने के बाद से ही कार्यशाला का बंटाधार हो गया है। मेंटीनेंस में लापरवाही बरती जा रही है, जिसके चलते बसें सड़कों पर नहीं उतर पा रही हैं। अमूमन आधी बसें यात्रियों को सेवाएं नहीं दे पा रही हैं। इसमें बड़ी संख्या में बसें मरम्मत के अभाव में डिपो में ही खड़ी रहती हैं। जबकि रास्ते में ब्रेकडाउन, चालकों व परिचालकों की कमी के कारण भी लग्जरी बसें यात्रियों को नसीब नहीं हो पा रही हैं। ये बसें डिपो में ही खड़ी रहती हैं, जबकि इन्हें सड़कों पर उतरकर यात्रियों को राहत देना था। एक बस प्रतिदिन एक राउंड लगाती है। कुछ बसें दो राउंड भी लगा लेती हैं। इससे औसतन चार हजार यात्री रोजाना लग्जरी बसें नहीं मिलने से परेशान हो रहे हैं।
लग्जरी बसों में खराबी की ये हैं वजहें
- 25 बसें औसतन मरम्मत के अभाव में प्रतिदिन डिपो में खड़ी रहती हैं।
- 3 से 4 बसें चालकों-परिचालकों के अभाव में खड़ी रहती हैं।
- 3 से 5 बसें बीच रास्ते खराब हो रही हैं।
- 2 से 4 बसें औसतन यात्री नहीं मिलने से खड़ी रहती हैं।
- एक जनरथ बस औसतन थाने में बंद रहती है।
पहले 10, अब औसतन 30 बसें रहती हैं खराब
रोडवेज के अधिकारी खुद बताते हैं कि जब अवध डिपो कार्यशाला की जिम्मेदारी विभाग के पास थी, उस दौरान रूटऑफ होने वाली बसों की संख्या कम थी। निजी हाथों में वर्कशॉप जाने के बाद से हालात खराब हुए हैं। 87 लग्जरी बसों में पहले पांच से दस बसें ही मरम्मत के अभाव में सड़कों पर नहीं उतर पाती थीं, लेकिन अब जब निजी हाथों में जिम्मेदारी सौंपी गई है तो रूटऑफ होने वाली बसों की संख्या बढ़कर 30 से 40 तक पहुंच जाती है।
19 वर्कशॉप हैं निजी हाथों में, हालात बदतर
प्रदेश में प्रतिदिन तीन हजार बसें डिपो से निकलकर सड़कों पर नहीं आ पा रही हैं। सूत्र बताते हैं कि निजीकरण के चलते ऐसा हो रहा है। दरअसल, रोडवेज प्रशासन ने 19 वर्कशॉप निजी हाथों को सौंप दिए हैं। अवध डिपो की बदहाली तब है, जब यह रोडवेज मुख्यालय परिसर में ही चल रही है और एमडी सहित आला अफसर बैठ रहे हैं। ऐसे में प्रदेश की अन्य कार्यशालाओं की बदहाली का अंदाज लगाया जा सकता है।
तीन महीने से नहीं पास हुए हैं बिल
Iअवध डिपो में लग्जरी एसी बसों का जो बेड़ा है, वह पुराना है। खस्ताहाल है। बसें बूढ़ी हो चली हैं। ऐसे में मरम्मत के बावजूद बसें सेवाएं नहीं दे पा रही हैं। इतना ही नहीं रोडवेज प्रशासन ने पिछले तीन महीने से भुगतान का बिल भी पास नहीं किया है, ऐसे में काम प्रभावित हो रहा है। I
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- ए. रहमान, डायरेक्टर, एसडीएल स्क्रैप वेंचर लिमिटेडI
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Iअवध डिपो की एसी जनरथ बसों की मरम्मत का जिम्मा निजी एजेंसी को सौंपा गया है। बड़ी संख्या में बसें रूटऑफ होने से राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस बाबत निजी एजेंसी से जवाब-तलब किया जाएगा। I
I-आरके त्रिपाठी, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेजI
डिपो में खड़ी जनरथ बसें।
डिपो में खड़ी जनरथ बसें।
डिपो में खड़ी जनरथ बसें।
डिपो में खड़ी जनरथ बसें।
डिपो में खड़ी जनरथ बसें।
डिपो में खड़ी जनरथ बसें।