नगराम। नगराम के छताैनी गांव में 19 सितंबर को नाले में मिले श्रमिक रामफेर के शव के मामले में पुलिस ने पत्नी मीरा, श्रमिक के रायबरेली निवासी रिश्ते के मामा बसंत लाल और साथी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी बसंत लाल का श्रमिक की पत्नी से प्रेम प्रसंग था। इसलिए उन्हें रास्ते से हटाने के लिए पत्नी ने हत्या की साजिश रची थी। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल गमछा और बाइक बरामद की गई है।
डीसीपी दक्षिणी निपुण अग्रवाल के मुताबिक मुख्य आरोपी बसंत लाल का श्रमिक के पड़ोस के घर में रहने वाली बहन के घर आना-जाना था। इस दौरान श्रमिक की पत्नी से उसकी मुलाकात हुई थी। फिर दोनों में प्रेम प्रसंग हो गया।
श्रमिक शराब के नशे का आदी था और आए दिन पत्नी को पीटता था। इसलिए उसकी पत्नी और मामा बसंत लाल ने श्रमिक को रास्ते से हटाने की ठान ली थी। हत्या की साजिश में मामा ने साथी उन्नाव के मौरावां के करदहा निवासी केतार को शामिल किया था।
आरोपी कई बार कर चुके थे कोशिश
आरोपियों ने कई बार हत्या की कोशिश की थी, मगर वे सफल नहीं हो सके थे। 18 सितंबर को पूरा परिवार गांव में आयोजित भजन-कीर्तन में गया था। घर में सिर्फ श्रमिक था। इसका फायदा उठाकर पत्नी ने प्रेमी और केतार को गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित नाले के पास बुला लिया था। वहां प्रेमी ने श्रमिक को शराब पीने के लिए बुलाया था।
नशे में होने पर गमछे से कसा गला
प्रेमी बाइक से साथी और श्रमिक के साथ शराब की दुकान पर पहुंचा और शराब खरीदी। फिर तीनों नाले के पास गए और शराब पी। श्रमिक के अधिक नशे में होने पर प्रेमी और केतार ने गमछे से गला कस कर उनकी हत्या कर दी। हत्या हादसा लगे इसलिए दोनों आरोपियों ने श्रमिक के शव को नाले में फेंक दिया था। दोनों मृतक का मोबाइल और चप्पल लेकर चले गए थे। रास्ते में इंदिरा नहर के पास उन्हाेंने झाड़ियों में दोनों चीजें फेंक दी थी।
सर्विलांस की मदद से पकड़ में आए
थानाध्यक्ष नगराम के मुताबिक पुलिस ने श्रमिक के भाई की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था। पुलिस टीम ने सर्विलांस पर मोबाइल लगाया और सीडीआर निकलवाई। सीडीआर में अंतिम बार बात बंसत लाल से होने की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने जब आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उसने वारदात कबूल ली। फिर श्रमिक की पत्नी और केतार को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
बच्चों से मां-पिता का साया हटा समाजसेवी ने थामा हाथ
श्रमिक की मौत होने और पत्नी के जेल जाने के बाद बेसहारा हुए उनके बच्चों की देखभाल व पढ़ाई की जिम्मेदारी समाजसेवी सुभाष गुप्ता ने ले ली। उन्होंने कहा कि वह 20 साल की उम्र तक दोनों बच्चों को जरूरतें पूरी करते रहेंगे। साथ ही सरकार से मिलने वाली रकम बच्चों को दिलवाने का प्रयास करेंगे।
रामफेर की फाइल फोटो।
रामफेर की फाइल फोटो।
रामफेर की फाइल फोटो।