प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में परित्यक्त और तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में आवास दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद ग्राम्य विकास विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है। योजना में आवास से वंचित अन्य श्रेणी के परिवारों को भी शामिल किया जा सकता है।
प्रदेश में 2018 में शुरू हुई मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में प्राकृतिक आपदा से पीड़ित परिवारों, कालाजार, वनटांगिया, मुसहर परिवार, जेई-एएसई और कुष्ठ रोग से पीड़ित आवासहीन परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
प्रदेश में योजना के तहत 60 हजार 563 परिवार चयनित किए गए हैं। इनमें प्राकृतिक आपदा से पीड़ित 15221, 4941 वनटांगिया, 34162 मूसहर, 123 कालाजार प्रभावित, 1919 जेई-एएसई प्रभावित और 3897 कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवार हैं। 2018-19 में योजना के तहत 14,832 आवास का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन ग्राम्य विकास विभाग ने लक्ष्य से अधिक 16700 परिवारों को आवास दिए। 2019-20 में 34040 परिवारों को आवास आवंटित करने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने गत दिनों विभागीय अधिकारियों की बैठक में सीएम आवास योजना में परित्यक्ता और तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को भी शामिल करने के निर्देश दिए थे। ग्राम्य विकास विभाग ने पुराने शासनादेश में संशोधन करते हुए लाभार्थी की श्रेणी में परित्यक्ता और तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को शामिल करते हुए प्रस्ताव शासन को भेजा है।
परित्यक्ता और तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को योजना में शामिल करने से हजारों महिलाओं को अपना घर मिल सकेगा। उधर, सूत्रों का कहना है कि योजना में अब उन परिवारों को भी शामिल किया जा सकता है जो प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में शामिल होने से वंचित रहे हैं।
इनका कहना है
तीन तलाक पीड़ित महिलाओं और परित्यक्ताओं को मुख्यमंत्री आवास देने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। मंजूरी मिलते ही पात्र महिलाओं को आवास आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
-के. रवीन्द्र नाईक, ग्राम्य विकास आयुक्त