लगता है कि मायावती और मुलायम सिंह को अब राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि यूपी के विधानसभा चुनाव में उन्हें मोदी के अलावा एक और चुनौती मिलने वाली है।
आम आदमी पार्टी सूबे में नए सिरे से संगठन को खड़ा करेगी। इसके लिए पार्टी पूरी मेहनत से लगेगी ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी मजबूती से हिस्सा ले सके।
लोकसभा चुनाव में प्रदेश में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन करने वाली ‘आप’ ने सोमवार को पहली बार अपनी हार की समीक्षा की।
खुद पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह ने राजधानी में पार्टी के प्रत्याशियों के साथ बैठक कर विचार-विमर्श किया। ज्यादातर प्रत्याशियों ने अपने गिले-शिकवे सुनाए।
दो ही जगह रहा पार्टी का फोकस
'आप' प्रत्याशियों की शिकायत यह थी कि पार्टी ने केवल अमेठी व वाराणसी लोकसभा सीट तक ही अपना फोकस रखा।
इस कारण दूसरी सीटों पर ध्यान नहीं दिया गया। पार्टी के पास अपना संगठन न होने के कारण भी प्रत्याशियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रत्याशियों ने संसाधनों का भी रोना रोया।
सभी प्रत्याशियों की बातें सुनने के बाद प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि सभी गिले-शिकवे भूलकर हमें फिर से पार्टी को खड़ा करना होगा। एक मजबूत संगठन तैयार कर आगे के चुनाव की तैयारी करनी होगी।
नहीं मिला अच्छा परिणाम
आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को वाराणसी में चुनौती देने उतरे लेकिन मोदी ने वाराणसी में एक तरफा जीत दर्ज की।
मोदी के पांच लाख इक्यासी हजार बाइस वोटों के मुकाबले केजरीवाल को दो लाख नौ हजार दो सौ अड़तीस वोट मिले। हालांकि वह कांग्रेस के अजय राय को मात देते हुए दूसरे नंबर पर रहे।
जबकि अमेठी में आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास चौथे नंबर पर रहे, उन्हें मात्र पच्चीस हजार, पांच सौ सत्ताइस वोट ही मिल सके।
अब पार्टी का मकसद 2017 के होने वाले विधानसभा चुनाव में मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाने का है, जिसके लिए पार्टी तैयारियां कर रही है।