लखनऊ। ठाकुरगंज स्थित संयुक्त चिकित्सालय के डॉक्टरों ने जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन कर नाक की गंभीर बीमारी से जूझ रही 22 वर्षीय युवती को नया जीवन दिया है। डॉक्टरों ने युवती के कान की हड्डी (कार्टिलेज) का इस्तेमाल कर उसकी नाक की टूटी हुई हड्डी दोबारा बनाई, जिससे उसे सांस लेने की तकलीफ से निजात मिल गई है।
ऐशबाग निवासी नेहा (22) करीब 11 माह पहले एक सड़क हादसे में जख्मी हो गई थीं। इस दुर्घटना में उनकी नाक की हड्डी (नैसल बोन) टूट गई थी, जिससे नाक ऊपर से चिपट गई थी। केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने उन्हें ऑगमेंटेशन राइनोप्लास्टी की सलाह दी थी। नेहा नौ महीने तक केजीएमयू में फॉलोअप पर रहीं, लेकिन ऑपरेशन में देरी के कारण उनकी सांस लेने की समस्या गंभीर होती गई।
अंततः परिजन उन्हें ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां ईएनटी सर्जन डॉ. अनित्य श्रीवास्तव ने उनकी स्थिति समझी। 18 फरवरी को किए गए इस जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों ने नेहा के कान (पिन्ना) से कार्टिलेज ग्राफ्ट लिया और उसे नाक में प्रत्यारोपित किया। करीब डेढ़ घंटे चले इस ऑपरेशन के बाद अब नेहा पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य रूप से सांस ले पा रही हैं।
निजी अस्पतालों में आता चार से पांच लाख रुपये खर्च
डॉ. अनित्य श्रीवास्तव ने बताया कि यदि यही सर्जरी किसी निजी अस्पताल में कराई जाती, तो करीब 4 से 5 लाख रुपये का खर्च आता, लेकिन ठाकुरगंज अस्पताल में यह ऑपरेशन महज सरकारी फीस में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
ऑपरेशन करने वाली टीम
ईएनटी सर्जन डॉ. अनित्य श्रीवास्तव, एनेस्थीसिया के डॉ. शाहिद अंसारी, स्टाफ नर्स कीर्ति उपाध्याय और नीतू पांडे।