लखनऊ। ठाकुरगंज के भूहर लालाबाग निवासी किराना दुकानदार पवन गुप्ता (35) ने बृहस्पतिवार रात आत्महत्या कर ली। छानबीन के दौरान पुलिस को सुसाइड नोट मिला। इसमें लिखा था कि मैं अपने जीवन में कुछ अच्छा नहीं कर पाया, इसलिए किसी को दोष नहीं देना चाहता। मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम भी मुझे छोड़ कर चली जाओगी।
पवन के चचेरे ससुर गिरधर ने बताया कि भतीजी अंकिता की तीन माह पहले पवन से शादी हुई थी। बृहस्पतिवार दोपहर किसी बात पर हुई कहासुनी के बाद पवन ने अंकिता को पीट दिया। गिरधर भतीजी को ससुराल से लेकर सआदतगंज ले आए। रात करीब 9:30 बजे पवन ने मकान की ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में लगे पंखे से दुपट्टे के सहारे फंदा लगा लिया। मां बीना ने रोशनदान से झांका तो पवन को फंदे से लटका देखा। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव नीचे उतारा। इंस्पेक्टर श्रीकांत राय के अनुसार, सुसाइड नोट से पता चला है कि पवन ने घरेलू कलह के चलते आत्महत्या की है।
ब्याज का पैसा न चुका पाने पर की आत्महत्या
ब्याज पर लिया पैसा न चुका पाने पर ठाकुरगंज के पुराना रज्जबगंज निवासी अमन (23) ने बृहस्पतिवार रात फंदा लगा लिया। सुबह सात बजे बहन संगीता कमरे में गई तो अमन को छत की धन्नी में मफलर और दुपट्टे से लटका पाया। उनके भाई मुकेश ने बताया कि अमन अविवाहित थे और मजदूरी करते थे। सालभर पहले हादसे में उनका एक हाथ टूट गया था। तब से कोई काम नहीं कर रहे थे। दो महीने पहले अमन ने इलाके के सूदखोर से 45 हजार रुपये कर्ज लिया था। सूदखोर ब्याज समेत 65 हजार रुपये लौटाने का दबाव बना रहा था। दो दिन पहले पैसों को लेकर झगड़ा भी हुआ था। परिवार में पांच भाई, मां शिववती और एक बहन संगीता है। इंस्पेक्टर श्रीकांत राय ने बताया कि तहरीर नहीं मिली है। (संवाद)
राजमिस्त्री ने लगाया फंदा
रहीमाबाद के कालिकाखेड़ा के रहने वाले राजमिस्त्री रज्जन लाल (42) ने आत्महत्या कर ली। उनके भांजे ठाकुरगंज निवासी जगदीश ने बताया कि रज्जन लाल बृहस्पतिवार रात नशे की हालत में घर लौटे और आंगन में सो गए। तड़के उनकी बहन सरोजनी घर से बाहर निकलीं तो थोड़ी दूर पर बाग में पेड़ से साड़ी के सहारे रज्जन लाल का शव लटका देखा। परिवार में पत्नी पूनम व तीन बच्चे हैं।
अवसाद के शिकार बुजुर्ग ने कर ली खुदकुशी
मड़ियांव के फैजुल्लागंज निवासी राजमिस्त्री रियाजुद्दीन अंसारी (60) ने खुदकुशी कर ली। उनके बेटे असलम ने बताया कि पिता बृहस्पतिवार सुबह काम पर गए थे। असलम, उनका भाई व मां जहरुन निशा भी काम पर चले गए। शाम को जब मां लौटीं तो दरवाजा बंद मिला। लोगों को बुलाकर दरवाजा तोड़ा गया ते रियाजुद्दीन पंखे में गमछे के सहारे लटके थे। बताया कि पिता नशे के लती थे। कुछ दिनों से किसी बात के चले अवसाद में थे।