लखनऊ। अचानक बोलने में परेशानी और शरीर के दाहिने हिस्से में कमजोरी के बाद केजीएमयू पहुंची महिला को समय पर इलाज मिलने से गंभीर लकवे से बचा लिया गया। नस के जरिये खून का थक्का घोलने वाला इंजेक्शन देने के कुछ घंटों में उनकी आवाज और हाथ-पैर की ताकत लौट आई। केजीएमयू के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि 21 अक्तूबर की सुबह आठ बजे लखनऊ निवासी महिला को स्ट्रोक के लक्षण हुए। जांच में उनका एनआईएचएसएस स्कोर आठ था। यह स्ट्रोक के कारण होने वाली परेशानी की गंभीरता का आकलन करने का पैमाना है। तत्काल सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें दिमाग में खून का रिसाव नहीं मिला। करीब 90 मिनट के भीतर उन्हें टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन दिया गया। समय पर इलाज से महिला की हालत में तेजी से सुधार हुआ।
डॉ. राजेश के नेतृत्व में डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. सरितेश, डॉ. स्नेहांग्श, डॉ. दीपांशु, डॉ. मयूर और डॉ. देबलीना की टीम ने इलाज किया। नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ ने भी सहयोग किया। अस्पताल प्रशासन ने महंगा इंजेक्शन मुफ्त उपलब्ध कराया। डॉ. राजेश ने बताया कि स्ट्रोक में समय बेहद अहम है। मरीजों को लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर इलाज मिलना चाहिए। देरी से दिमाग को स्थायी नुकसान हो सकता है।