प्रधानमंत्री आवास योजना-सबके लिए आवास (शहरी) मिशन यूपी में भले ही देर से लागू की गई हो, पर इसे तेजी से क्रियान्वित करने को लेकर सरकार ने कवायद शुरू कर दी है।
लाभार्थियों को योजना का लाभ जल्द दिलाने के लिए सरकार ने निगरानी, तकनीकी समितियां गठित कर दी हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निगरानी समिति और मिशन निदेशक की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय मूल्यांकन समिति बनी है।
केंद्र सरकार ने इस योजना को पिछले साल 25 जून को ही लागू किया था, लेकिन यूपी सरकार ने योजना लागू करने में देर कर दी। चूंकि अन्य प्रदेशों की तुलना में यूपी प्रधानमंत्री आवास योजना में दस महीने पिछड़ गया है, इसलिए राज्य सरकार की मंशा है कि योजना को तीव्र गति से क्रियान्वित किया जाए।
उधर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार इससे पहले ही प्रधानमंत्री योजना का लाभ जनता तक पहुंचाना चाहती है। हालांकि राज्य सरकार का प्रयास है कि इसका क्रियान्वयन इस तरह हो कि जनता को यह मैसेज दिया जा सके कि राज्य सरकार की पहल से ही इस योजना का लाभ इतनी जल्दी मिला है।
बनाई गई है 10 सदस्यीय टीम
इसी के तहत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय निगरानी समिति का गठन किया गया है। जिसमें कई विभागों के प्रमुख सचिवों को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा दो सदस्यीय राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति का भी गठन किया गया है, जो योजना के डीपीआर से संबंधित तकनीकी व आर्थिक मूल्यांकन करेगी।
10 सदस्यीय निगरानी समिति
-मुख्य सचिव- अध्यक्ष
-प्रमुख सचिव/सचिव -उपाध्यक्ष
(नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभाग
-प्रमुख सचिव/सचिव, नगर विकास-सदस्य
-प्रमुख सचिव/सचिव, वित्त-सदस्य
-प्रमुख सचिव/सचिव, राजस्व-सदस्य
-प्रमुख सचिव/सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन-सदस्य
-प्रमुख सचिव/सचिव, पर्यावरण
-संयोजक, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति- सदस्य
-मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक उप्र-सदस्य
-निदेशक, राज्य नगरीय विकास अभिकरण-सदस्य
गुणवत्ता परखने के लिए बनेगी ये टीम
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प्रधानमंत्री आवास योजना- सबके लिए आवास (शहरी) मिशन के अधीन एक प्रौद्योगिकी उप-मिशन का भी गठन होगा।
यह मिशन योजना के तहत बनने वाले आवासों की गुणवत्ता पर नजर रखने के साथ ही योजना क्रियान्वयन में आधुनिक एवं अभिनव तकनीक, हरित प्रौद्योगिकी एवं भवन सामग्री के प्रयोग के सुझाव भी देगा।