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उर्दू पढ़ते समय दिमाग का ज्यादा हिस्सा होता है सक्रिय, अध्ययन में हुआ खुलासा

Tue, 21 Jan 2020 04:16 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
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ब्रेन मैपिंग व डॉ उत्तम कुमार - फोटो : अमर उजाला
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हिंदी बाएं से दाएं लिखी जाती है और उर्दू दाएं से बाएं। पर, क्या ये लिखावट का अंतर पढ़ते समय हमारे दिमाग पर भी कुछ अंतर डालता हैं? तो इसका जवाब ‘हां’ है। उर्दू पढ़ते समय हिंदी और अंग्रेजी के मुकाबले हमारे दिमाग के ज्यादा हिस्से सक्रिय होते हैं। फायदा होने के साथ इसका नुकसान भी है। सेंटर फॉर बायो मेडिकल रिसर्च के ब्रेन एंड बिहैवियर विशेषज्ञ डॉ. उत्तम कुमार ने अपने अध्ययन में इसका खुलासा किया है।

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डॉ. उत्तम कुमार बताते हैं कि पैरालिसिस होने की दशा में हिंदी भाषियों की तरह स्पीच थेरेपी देने पर उर्दू वाले में वह असर नहीं दिखता। इनकी स्पीच थेरैपी न केवल कठिन होती है, बल्कि इसका समय भी बढ़ाना पड़ता है। लिहाजा हमने इसकी वजह तलाशने की कोशिश की।

अध्ययन में हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भाषियों के 20-20 लोगों को शामिल किया। हर किसी को 30 मिनट तक संबंधित भाषा पढ़ने के लिए शब्द दिए गए। जिस वक्त वे शब्द पढ़ रहे थे फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग और डिफ्यूज टेंसार इमेजिंग के जरिये इनके दिमाग के हिस्सों की सक्रियता के बारे में जानकारी ली गई। इस अध्ययन को अलग-अलग समय पर अमेरिकन जर्नल ऑफ रीडिंग एंड राइटिंग में प्रकाशित किया गया है।

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हिंदी पढ़ते समय ज्यादा सक्रिय रहता है दिमाग का ऊपरी हिस्सा

डॉ उत्तम कुमार - फोटो : अमर उजाला
हिंदी पढ़ते समय दिमाग का ऊपरी हिस्सा ज्यादा सक्रिय रहा। इनमें शब्द समझने में मददगार इंफीरियर फ्रंटल गायरस, दृश्य समझने में मददगार इंफीरियर ऑक्सीपिटल, शब्द संरचना समझने में मददगार सुपीरियर पेराइटल, अर्थ समझाने में मददगार इंफीरियर टेंपोरल गायरस के हिस्से सक्रिय पाए गए।

उर्दू पढ़ते समय हाल
उर्दू पढ़ने वालों के दिमाग के ऊपरी के साथ निचला हिस्सा भी सक्रिय रहता है। लिखावट समझने में मददगार सेंट्रल ऑक्सीपिटल टेंपोरल, उच्चारण में मददगार मिडिल फ्रंटल गायरस, दृश्य समझने में मददगार मिडिल ऑक्सीपिटल भी सक्रिय मिला।
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इसलिए अधिक हिस्सा होता है सक्रिय

ब्रेन मैपिंग - फोटो : अमर उजाला
अध्ययन में सामने आया कि उर्दू की लिखावट की दिशा बदलने से व्यक्ति डायरेक्शनल स्कैनिंग करने की अलग क्षमता विकसित कर लेता है, जो हमारी बोलने-समझने की क्षमता को भी प्रभावित करती है। अंग्रेजी भाषियों में दिमागी सर्किट से तालमेल बिठाने वाले लेफ्ट पोस्ट सेंट्रल रिजन, प्री सेंट्रल गायरस और पुटामेन सक्रिय पाए गए। पुटामेन हिस्सा अंग्रेजी के एक्सेंट कोे समझने में मददगार साबित होता है।

अध्ययन इसलिए खास : विकसित की जा रही नई तकनीक
उर्दू पढ़ते समय दिमाग के दोनों हिस्से और सर्किट के सभी हिस्से सक्रिय रहते हैं। ऐसे में पैरालिसिस होने, शब्दों को समझने में दिक्कत होने, सिर में चोट होने पर उर्दू भाषियों की स्पीच थेरैपी आसान नहीं होती। इसलिए अध्ययन के नतीजों के बाद इनके लिए नई तकनीक विकसित की जा रही है।
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