सुरक्षा के लिए इतना तो कर सकते हैं
एप : यूपी100 इमरजेंसी सर्विसेज
साइज : 9.8 एमबी
रेटिंग : 4.1
यूजर- करीब 50 हजार
काम : पुलिस का आधिकारिक डायल 100 प्रोजेक्ट एप्लीकेशन। नागरिकों को सुरक्षा से जुड़ी आपात स्थितियों में मदद के लिए।
ये जानकारियां लेता है : नाम, उम्र, जेंडर, फोन से जुड़े सोशल मीडिया व ई-मेल अकाउंट, कॉन्टैक्ट्स, नेटवर्क व जीपीएस आधारित लोकेशन, यूजर्स की पहचान, फोन व मेमोरी कार्ड में मौजूद फोटो व अन्य मल्टीमीडिया फाइलें। साथ ही फोन कैमरे से फोटो खींचने, माइक्रोफोन से ऑडियो रिकॉर्ड करने, कॉल डिटेल्स लेने, इंटरनेट डेटा उपयोग करने, गूगल सर्च हिस्ट्री।
क्या करें : ये सभी जानकारियां लेना इसलिए जरूरी है ताकि आपात स्थिति में आप तक मदद पहुंचाने में सुविधा मिले। प्राइवेसी पॉलिसी में यूपी पुलिस निजी जानकारियां कहीं और न देने का वादा करती हैं।
लखनऊ म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन
- फोटो : amar ujala
एप : लखनऊ मेट्रो (प्राइवेट)
साइज : 4.9 एमबी
रेटिंग : 4.4 स्टार
काम : मैप और नेविगेशन, मेट्रो रेल रूट, पास के स्टेशन का पता, किराया, रिचार्ज आदि बताने और मेट्रो से जुड़ी विभिन्न जानकारियों के लिए।
यूजर : करीब पांच हजार
यह जानकारियां लेता है : जीपीएस से आपकी लोकेशन, नेटवर्क आधारित आपकी लोकेशन, इंटरनेट से डाटा लेना, नेटवर्क तक पहुंच।
क्या करें : मेट्रो स्टेशन कितनी दूर है, ये बताने के लिए आपकी लोकेशन एप को पता होनी चाहिए। लेकिन यह अनुमति केवल एप का उपयोग करते समय ही दें।
एप : उप्र सरकार जनसुनवाई
साइज : 1.3 एमबी
रेटिंग : 4.4
यूजर: करीब पांच हजार
काम : सरकारी कामों से जुड़ी शिकायतें दर्ज करवाना, उनका फॉलोअप और कार्रवाई सुनिश्चित करवाना।
ये जानकारियां लेता है : फोन व मेमोरी कार्ड से न सिर्फ डाटा कॉपी कर सकता है, बल्कि उसे डिलीट भी कर सकता है, नेटवर्क लोकेशन हासिल करता है।
उपयोगिता कितनी : एप द्वारा ली जा रही जानकारियां केवल शिकायत करने तक सीमित होनी चाहिए। शिकायत करते समय ही एप को अनुमति दें।
एप : स्वच्छ भारत अभियान
साइज : 3.6 एमबी
रेटिंग : 4.2
यूजर: करीब 10 लाख (देश भर में)
काम : शहर और अपने आसपास क्षेत्र में सफाई रखने के लिए यह एप बनाया गया। लखनऊ के नागरिक अपने शहर की डिटेल भर कर अपने यहां मौजूद गंदगी की समस्या उठा सकते हैं।
यह जानकारियां लेता है : आपके फोन में मौजूद ईमेल अकाउंट की जानकारी, कॉन्टैक्ट्स, नेटवर्क व जीपीएस आधारित लोकेशन, फोटो व अन्य मल्टीमीडिया कंटेंट, फोन मेमोरी व मेमोरी कार्ड में मौजूद कंटेंट, वाई-फाई कनेक्शन की जानकारी, इंटरनेट डाटा उपयोग करने का अधिकार, नेटवर्क पर अधिकार, गूगल के कंफिगरेशन।
क्या करें : सफाई से जुड़ी शिकायत के लिए जितनी जानकारियां चाहिए, उससे कहीं ज्यादा यह एप आपके सेलफोन से हासिल कर रहा है। इस एप को दी गई अनुमतियों को जांचें।
आप उपभोक्ता नहीं तो उत्पाद हैं - नितनेम सिंह
सबसे पहले यह समझने की जरूरत है कि आपका डाटा क्यों लिया जा रहा है। एक उदाहरण देता हूं, मान लीजिए आपके फोन में स्वच्छ भारत अभियान एप्लीकेशन है। यह दर्शाता है कि आप सफाई के पाबंद हैं। लखनऊ में अगर 10 लोग इसका उपयोग कर रहे हैं तो सफाई से जुड़े उत्पाद बनाने वाली कंपनियां मानती हैं कि इन लोगों के बीच वे अपने उत्पाद बेच सकती हैं। तो ये कंपनियां आप तक पहुंचे कैसे? यहीं आपका एप के जरिये स्टोर किया डाटा काम आता है। कंपनियों को आपका ईमेल, फेसबुक अकाउंट पता होगा तो वे अपने उत्पाद को ‘टारगेटेड कस्टमर’ यानी आप तक विज्ञापन के जरिये पहुंचाएंगी। स्वच्छ भारत एप केवल उदाहरण के रूप में बता रहा हूं।
खतरे क्या हैं?
अगर एप्लीकेशन आपसे कोई निश्चित डाटा मांग रहे हैं और परमिशन मिलती है तो वे निश्चित तौर पर उसे स्टोर करते हैं। इस डाटा भंडार के दम पर आजकल ‘डाटा माइनिंग और एनालिसिस’ करने वाली कंपनियां संभावित मार्केटिंग कंपनियों को उनकी जरूरत के अनुसार बेच कर फल फूल रही हैं। यानी जब तक आप उपभोक्ता नहीं हैं, आप उत्पाद हैं।
सरकारी एप भी सेफ नहीं
यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि सरकारी एप का सभी तरह का डाटा सुरक्षित है। अधिकतर एप प्राइवेट कंपनियां बना रही हैं। सरकारी विभागों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि जिस काम के लिए वह एप बना है, उससे इतर कोई डाटा वह एप स्टोर न करे। अभी ऐसा नहीं हो रहा, इसलिए संदेह पैदा होता है।
सुरक्षा के लिए ये दो काम जरूर करें
-सबसे पहले प्राइवेट कंपनियों के एप इंस्टॉल करना बंद करें, बेहद जरूरी हो तो कुछ समय के लिए उसे इंस्टॉल करके काम पूरा होने पर अनइंस्टॉल कर दें।
-दूसरा फोन की सेटिंग में जाकर डाटा परमिशन चेक करें, हर अपडेट के बाद भी इसे चेक करें। एप कौन-सा डाटा आपके फोन से लेगा, कौन-सा नहीं, यह खुद जांचें।