इमरजेंसी के तुरंत बाद हुए चुनाव में लखनऊ लोकसभा क्षेत्र में हेमवती नंदन बहुगुणा को मिले वोटों के प्रतिशत का रिकॉर्ड आज तक कोई भी प्रत्याशी नहीं तोड़ सका।
भारतीय लोकदल के बैनर तले सन 1977 में उन्हें 72.99 फीसदी वोट मिले थे। यहां तक कि प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले अटल विहारी वाजपेयी को भी इतने प्रतिशत वोट कभी नहीं मिले।
सन 77 से अब तक 10 चुनाव हो चुके हैं। इन चुनावों में विजयी रहे प्रत्याशियों में मत प्रतिशत के लिहाज से दूसरा स्थान भाजपा के अटल विहारी वाजपेयी का रहा।
1998 में वे 57.82 फीसदी मत लेकर जीते थे। जबकि 2004 के चुनाव में 56.12 प्रतिशत मत मिले थे।
टंडन के नाम सबसे कम अंतर
इस सीट पर सबसे कम मत लेकर जीतने वालों में जनता दल के मांधाता सिंह और भाजपा के लालजी टंडन रहे।
मांधाता सिंह को 1989 में महज 34.08 प्रतिशत और लालजी टंडन को इससे थोड़ा ज्यादा 34.93 प्रतिशत मत मिले थे।
लखनऊ के चुनावी इतिहास में अब तक सबसे दमदार रनर अप अभिनेता से नेता बने राजबब्बर रहे। 1996 में सपा के टिकट पर उन्हें 36.55 प्रतिशत वोट मिले थे।
वहीं, रनर अप में सबसे कम वोट पाने वाले एलकेडी के मो. यूनुस सलीम रहे जिन्हें 1984 में महज 15.5 फीसदी वोट मिले थे।
अब तक यें रहे नवाबों के 'नवाब'
1977-हेमवती नंदन बहुगुणा(बीएलडी)-72.99
1980-शीला कौल (कांग्रेस-इंदिरा)-47.65
1984-शीला कौल (कांग्रेस)-55.67
1989-मांधाता सिंह (जनता दल)-34.08
1991-अटल बिहारी वाजपेयी (भाजपा)-50.9
1996-अटल बिहारी वाजपेयी (भाजपा)-52.25
1998-अटल बिहारी वाजपेयी (भाजपा)-57.82
1999-अटल बिहारी वाजपेयी (भाजपा)-48.11
2004-अटल बिहारी वाजपेयी (भाजपा)-56.12
2009-लालजी टंडन (भाजपा)-34.93
(नोट : कुल पड़े मतों के आधार पर यह गणना की गई है। स्रोत : चुनाव आयोग)
इन्होंने पेश की सियासी टक्कर
1977-शीला कौल (कांग्रेस)-23.19
1980-महमूद बट (जेएनपी)-35.9
1984-यूनुस सलीम (एलकेडी)-15.5
1989-दाऊजी (कांग्रेस)-29.36
1991-रंजीत सिंह (कांग्रेस)-20.26
1996-राज बब्बर (सपा)-36.55
1998-मुजफ्फर अली (सपा)-28.86
1999-डॉ. कर्ण सिंह (कांग्रेस)-31.71
2004-मधु गुप्ता (सपा)-18.8
2009-रीता बहुगुणा जोशी (कांग्रेस)-27.93
(नोट : कुल पड़े मतों के आधार पर यह गणना की गई है। स्रोत : चुनाव आयोग)