सूत्रों की मानें तो किशोरी को डेंटल चेयर पर लेटाने के बाद रेजीडेंट ने इन्टर्न छात्रा से इंजेक्शन लगाने के लिए कह दिया। छात्रा ने मसूड़ा सुन्न करने में प्रयोग की जाने वाली डाइलोकेन की दवा सीरिंज में ली। रेजीडेंट ने देखा कि सीरिंज में ढाई एमएल के बजाय काफी कम मात्रा में दवा है। इस पर उसने डोज बढ़ाने के लिए कहा।
इन्टर्न ने दोबारा दवा भरते समय डाइकोलेन के बजाय वहां रखी फार्मेलिन भर लिया और उसे किशोरी को लगा दिया। यह इंजेक्शन लगते ही किशोरी का चेहरा टेढ़ा हो गया। जलन होने से वह चिल्लाने लगी। यह देख अन्य चिकित्सक कमरे में आए और इन्टर्न से पूछताछ की। इस दौरान पता चला कि गलत इंजेक्शन लग गया है, लेकिन पूरे मामले को दबाए रखा गया।
जांच कमेटी गठित करने के निर्देश
मामले पर केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि गलत इंजेक्शन लगाने की बात सामने आई है। इसकी जांच कराई जा रही है। तब तक के लिए संबंधित रेजीडेंट और इन्टर्न को निलंबित कर दिया गया है। कुलपति ने दंत संकाय के डीन को जांच कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है।