विधानसभा भवन के सामने सोमवार शाम मकान मालिक से विवाद को लेकर हुसैनगंज के सुरेंद्र चक्रवर्ती ने खुद को आग लगा ली। आसपास तैनात पुलिसकर्मियों ने किसी तरह आग बुझाई और उसे कंबल में लपेटकर सिविल अस्पताल ले गए। पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय ने उसका हालचाल लिया। सुरेंद्र के शरीर का ऊपरी हिस्सा 60 प्रतिशत से अधिक जल गया है। इससे पहले सुबह बाराबंकी का परिवार जमीन के विवाद में आत्मदाह करने विधानसभा भवन पहुंचा था, जिसे पुलिस ने पकड़ लिया था।
पुलिस उपायुक्त मध्य सोमेन बर्मा ने बताया कि सुरेंद्र हुसैनगंज की डायमंड डेयरी कॉलोनी में जावेद के मकान में किराये पर रहता है। जावेद सिंचाई विभाग में इंजीनियर है। सुरेंद्र उसके मकान में वर्ष 2008 से रह रहा है और फोटोकॉपी मशीन लगाकर परिवार का पेट पालता है। वर्ष 2013 से दोनों मेें मकान खाली कराने को लेकर विवाद चल रहा है। मामला कोर्ट में है। सुरेंद्र ने बताया कि सोमवार को मकान मालिक ने उसे घर से निकाल दिया। इससे दुखी होकर वह पैदल विधानसभा भवन के गेट नंबर तीन के सामने पहुंचा और शरीर पर ज्वलशील पदार्थ उड़ेलकर आग लगा ली। सुरेंद्र का कहना है कि मामला कोर्ट में है, इसके बावजूद उसे घर से निकाल दिया गया। पुलिस आयुक्त ने कहा कि आरोपी मकान मालिक को पकड़ने के लिए चार टीमें लगाई गई हैं। वहीं, सुरेंद्र को बचाने में चार पुलिसकर्मियों के हाथ झुलस गए।
वहीं, घटना से पांच घंटे पहले बाराबंकी सदर कोतवाली के नटखेड़वा का मो. नसीर पत्नी राबिया, बेटे सलीम व अजीज के साथ आत्मदाह करने विधानसभा भवन के सामने पहुंच गया, जिसे पुलिस ने दबोच लिया। सहायक पुलिस उपायुक्त मध्य चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि परिवारजन लोकभवन के गेट नंबर तीन के पास बोतल में भरा ज्वलनशील पदार्थ शरीर पर डालने लगे, तभी पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और कोतवाली ले आए। नसीर ने बताया कि वह सरकारी जमीन पर दुकान करता था जिसे नगर निगम ने तोड़कर उसका कब्जा हटवा दिया था। उसे दूसरी जगह पर जमीन दी गई, लेकिन नसीर पुरानी जगह ही वापस चाहता था। उसने अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन बात नहीं बनी तो वह सपरिवार आत्मदाह करने लखनऊ आ गया। बाराबंकी पुलिस से संपर्क कर उसे वापस भेज दिया गया है।