परवेज के साले शकील का कहना है कि बीते तीन दिन से लगातार उवैश और बॉबी उसके घर आकर गाली-गलौज व मारपीट कर रहे थे। पीड़ित शिकायत लेकर चौकी जाता तो उसे भगा दिया जाता। शुक्रवार को परवेज ने हजरतगंज कोतवाली जाकर भाइयों के खिलाफ तहरीर दी थी।
यह जानकारी उवैश और बॉबी को मिली तो उन्होंने न सिर्फ उसे धमकाया बल्कि रही चौकी बुलवाकर गाली-गलौज भी की। चौकी के पुलिसकर्मियों से कहकर उसे वहां बैठा दिया गया। शकील और अलीम हजरतगंज कोतवाली स्थित एसीपी राघवेंद्र कुमार मिश्रा के कार्यालय पहुंचे और उन्हें पूरे प्रकरण की जानकारी दी। वहां से मदद न मिलने पर शकील और अलीम ने डीसीपी मध्य सोमेन वर्मा से संपर्क किया। डीसीपी ने दोनों को शनिवार सुबह बुलाया लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। शनिवार सुबह करीब आठ बजे परवेज ने फांसी लगा ली।
उलझन और डर के चलते रातभर नहीं सोया परवेज
महजबी का कहना है कि भाइयों की प्रताड़ना और पुलिस की दहशत से पति रातभर बेचैन रहे। वह हर वक्त यही बड़बड़ाते रहे कि मेरे भाई सुबह मुझे मार डालेंगे। महजबी ने उसे समझाने का प्रयास किया लेकिन उसकी हालत नहीं सुधरी। शनिवार सुबह करीब आठ बजे वह कमरे से बाहर जाने लगा तो महजबी ने पूछा। उसने कहा कि वह टॉयलेट जा रहा है। करीब आधे घंटे तक वह नहीं लौटा तो महजबी नीचे आईं। बॉबी के कमरे के बाहर दालान में परवेज फंदे से लटक रहा था।
पति को फंदे से लटका देख महजबी के होश उड़ गए। वह पति की जान बचाने के लिए चीखने-रोने लगी। इस पर बॉबी अपने कमरे से बाहर निकल आया। अपने भाई को फंदे से झूलता देख भी उसका दिल नहीं पसीजा। बोला, दो मिनट और लटकने दो। महजबी ने पति के पैर पकड़ लिए और मदद के लिए गुहार लगाने लगी। आसपास के लोगों ने उसका शोर सुना तो वह मौके पर आए। फंदा काटकर उसे अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल जाते वक्त रिक्शा से खींचकर पीटा
महजबी का आरोप है कि उसके पति की मौत के बाद भी जेठ उवैश और देवर बॉबी के अलावा उवैश की पत्नी मुमताज, बेटे गुलजार तथा मोहसिन व आमिर ने उसे नहीं बख्शा और सरेराह मारपीट की। उसने बताया कि पति का शव सिविल अस्पताल में पड़ा था। वह रिक्शा से अस्पताल जा रही थी तभी रास्ते में उपरोक्त सभी लोग मिल गए और गालियां देते हुए रिक्शा से खींचकर पीटना शुरू कर दिया। उस वक्त पुलिस मौके पर मौजूद थी लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा।
शकील का कहना है कि हजरतगंज पुलिस शुरू से ही आरोपियों के साथ खड़ी थी। मुहल्ले का हर व्यक्ति परवेज के पक्ष में था। सभी उसके भाइयों की दादागिरी और दबंगई के विरोध में थे। सिर्फ पुलिस ही आरोपियों की पैरोकारी कर रही थी।
परवेज जब भी शिकायत करने गया, पुलिस ने उसे डांट-फटकार कर भगा दिया। शुक्रवार को भी एसीपी हजरतगंज के सामने नरही चौकी की पुलिस ने परवेज को डांटा-फटकारा। देर शाम भी पुलिस उसे बार-बार फोन करके नरही चौकी बुला रही थी जिससे वह बहुत घबरा गया था।