उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को 160 सरकारी वकीलों की सूची जारी कर दी। रिव्यू के बाद जारी की गई इस लिस्ट में पहले स्थान पाए 40 वकीलों का नाम हटा दिया गया है।
पिछली सरकारों में तैनात रहे वकीलों को एक बार फिर मौका दिया गया है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट की फटकार के बाद संघ और संगठन के दबाव को दरकिनार करते हुए नई लिस्ट जारी की गई है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर कठोर टिप्पणी करते हुए कहा था कि सरकारी वकीलों का पद जिम्मेदारी वाला होता है।
इन्हें रेवड़ियों की तरह नहीं बांटा जा सकता। कोर्ट ने सरकारी वकीलों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए सूची के दोबारा जांच के आदेश दिए थे।