अपनी मर्जी से शादी करने के बाद अभिभावकों द्वारा दर्ज करवाए पुलिस केस की वजह से नारी निकेतन भेज दी गई एक लड़की के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आदेश दिया है कि उसे उसकी मर्जी से कहीं भी जाने और जीने दिया जाए।
अपने फैसले में अदालत ने कहा, न्यायिक संज्ञान के आधार पर हम जानते हैं कि नारी निकेतनों की परिस्थितियां आदर्श नहीं हैं और वहां लड़कियों को आश्रय नहीं दिलाया जा सकता। लड़कियों को आश्रय दिलाने के लिए नारी निकेतन आखिरी विकल्प होने चाहिए।
मामला लखनऊ के राजकीय नारी महिला शरणालय में रखी गई एक लड़की से संबंधित है। जस्टिस अजय लांबा व जस्टिस आदित्यनाथ मित्तल ने कहा कि अगर लड़की उम्र व दिमागी तौर पर बालिग है और अपनी मर्जी से किसी के साथ जाना चाहे और इसका विकल्प उसके सामने उपलब्ध हो तो उसे नारी निकेतन में रखने की कोई जरूरत नहीं है।