फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लड़की को अपनी मर्जी से जीने का हक: हाईकोर्ट

Tue, 19 Jan 2016 04:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
अपनी मर्जी से शादी करने के बाद अभिभावकों द्वारा दर्ज करवाए पुलिस केस की वजह से नारी निकेतन भेज दी गई एक लड़की के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आदेश दिया है कि उसे उसकी मर्जी से कहीं भी जाने और जीने दिया जाए।
विज्ञापन


अपने फैसले में अदालत ने कहा, न्यायिक संज्ञान के आधार पर हम जानते हैं कि नारी निकेतनों की परिस्थितियां आदर्श नहीं हैं और वहां लड़कियों को आश्रय नहीं दिलाया जा सकता। लड़कियों को आश्रय दिलाने के लिए नारी निकेतन आखिरी विकल्प होने चाहिए।

मामला लखनऊ के राजकीय नारी महिला शरणालय में रखी गई एक लड़की से संबंधित है। जस्टिस अजय लांबा व जस्टिस आदित्यनाथ मित्तल ने कहा कि अगर लड़की उम्र व दिमागी तौर पर बालिग है और अपनी मर्जी से किसी के साथ जाना चाहे और इसका विकल्प उसके सामने उपलब्ध हो तो उसे नारी निकेतन में रखने की कोई जरूरत नहीं है।
विज्ञापन

विज्ञापन

अदालत में पीड़िता ने बताई अपनी इच्छा

गौरतलब है, लखीमपुर खीरी की एक लड़की ने अपनी मर्जी से विवाह किया था। इसे उसके पिता ने स्वीकार नहीं किया और लड़के पर अपनी बेटी के अपहरण और जबरन शादी करने का मामला पुलिस में दर्ज करा दिया।

जांच के दौरान लड़की ने बयान दिया कि उसने अपनी मर्जी से विवाह किया है और अपने साथी के साथ रहना चाहती है। लेकिन उसके ऑसिफिकेशन (उम्र की पड़ताल के लिए हड्डियों की जांच) में उम्र 17 वर्ष निकली। इसके आधार पर बाल कल्याण समिति लखीमपुर ने उसे 10 अप्रैल 2015 को लखनऊ के नारी निकेतन में आश्रय दिलाने का आदेश दिया।

लड़की की ओर से उसके दोस्त ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया था कि नारी निकेतन भेजकर पीड़िता की आजादी खत्म कर दी गई है। वह पिता के घर नहीं दोस्त के साथ जाना चाहती है। जब अदालत ने पीड़िता को बुलवा कर सवाल किया तो उसने अपने दोस्त के साथ जाने की इच्छा जताई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें