लखनऊ। साइबर थाना और गोसाईगंज की संयुक्त पुलिस टीम ने क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर लोगों के खातों से करोड़ों का लेनदेन करने वाले गिरोह का राजफाश किया है। पुलिस ने कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने महज दो माह में अलग अलग खातों से 80 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन किया था।
साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार यादव ने बताया कि लगातार लोगों के खातों में ठगी की मोटी रकम ट्रांसफर होने की सूचना मिल रही थी। ठगी के शिकार लोगों ने साइबर थाना, साइबर सेल और गोसाईगंज थाने में शिकायत की थी। पड़ताल के दौरान मोहनलालगंज के जैतीखेड़ा निवासी सत्यम तिवारी, सेक्टर जे जानकीपुरम निवासी कृष शुक्ला, निलमथा निवासी मनीष जायसवाल, गोंडा के मनिकापुर स्थित जवाहरनगर निवासी लईक अहमद बस्ती के बेम्हारी दुबोलिया बाजार निवासी दिवाकर विक्रम सिंह, रायबरेली के खाली शाह टोला, किला बाजार निवासी सक्षम तिवारी, गाेंडा के करदा वजीरगंज निवासी विनोद कुमार और बाराबंकी के लौताबाग निवासी मो. शाद को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के पास से 16 मोबाइल फोन, दो लैपटाप, एक टैब, एक लाख 85 हजार रुपये, चेक बुक, पास बुक और चार वाहन बरामद किए गए हैं।
चीन के अपराधियों से जुड़ा है नेटवर्क
छानबीन में सामने आया है कि गिरोह पूरा ऑपरेशन टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से संचालित करता है। गिरोह चीन के साइबर अपराधियों से जुड़ा है, जिनके इशारे पर ही सारा काम किया जाता था। आरोपी यूएसडीटी टेदर (एक क्रिप्टोकरेंसी है जिसे अमेरिकी डॉलर के बराबर रखने के लिए डिजाइन किया गया है) के जरिये निवेश करते हैं। इस दौरान किसी भी कानूनी क्रिप्टो एक्सचेंज से बचते हैं। आरोपी पहचान छिपाने के लिए यूजरनेम बार-बार बदले देते हैं।
खाते में मंगाते हैं धोखाधड़ी के शिकार लोगों की रकम
स्थानीय एजेंट बड़ी रकम के लेनदेन के लिए भारतीय नागरिकों को उनके बैंक खातों का उपयोग करने के लिए कमीशन का लालच देते हैं। इस दौरान खाता धारकों को बताया जाता है कि उनके खाते लेनदेन के बाद फ्रीज हो सकते हैं। कमीशन के लालच में धोखाधड़ी के शिकार लोगों की रकम अपने खाते में मंगा लेते हैं। इस दौरान केवाईसी से बचते हैं और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हैं। खाते में रकम आने के बाद खाता धारक को बैंक ले जाया जाता है। बैंक से कैश निकलवाया जाता है और फिर खाता धारक को कमीशन देने के बाद आरोपी वहां से निकल जाते हैं। आगे का काम क्रिप्टो ब्रोकर को सौंपा जाता है, जो यूएसडीटी के जरिये सरगना को रकम ट्रांसफर कर देता है। पूछताछ में आरोपी खुद को क्रिप्टो ट्रेडर बताते हैं। हालांकि, छानबीन के दौरान आरोपी कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाए।