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देर तक नाचते रहे बाराती, लड़की के बाप ने लगायी फांसी

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काकोरी क्षेत्र में बुधवार रात एक किसान ने अपने दरवाजे पर आई बारात का स्वागत तो किया, लेकिन देर से आने पर नाराजगी भी जता दी। इसे लेकर बारातियों से कहासुनी हो गई। घरातियों ने बीच-बचाव कर उन्हें शांत करा द्वारचार और जयमाल के बाद फेरों का कार्यक्रम भी हुआ, लेकिन कन्यादान से पहले ही पिता ने फांसी लगा ली।
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शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने तक बारात रुकी रही और दुल्हन औपचारिक विदाई के बाद मायके आ गई। काकोरी के मेंहदीनगर, बहरू निवासी मुंशीलाल रावत (45) ने बेटी श्रीकांती का विवाह दुर्गागंज के मुन्नीलाल के बेटे सर्वेश के संग तय किया था। बारात शाम 8 बजे पहुंचनी थी, लेकिन साढ़े दस बजे पहुंची। इसके बाद बाराती नाचते-गाते रहे तो और देरी हो गई।

इस पर मुंशीलाल ने बारातियों से नाराजगी जताई। घर के दूसरे सदस्य बीचबचाव करने पहुंचे तो मुंशीलाल ने उन्हें भी भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। इसके बाद परिवारीजनों ने मुंशीलाल को शांत करा दिया और द्वारचार की पूजा हुई।
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जयमाल के बाद बारातियों ने भोजन ग्रहण किया। इसके बाद मुंशीलाल चारपाई पर जाकर लेट गए थे। फेरों के समय मंत्र पढ़े जाने लगे और पंडित ने कन्यादान के लिए पिता को बुलाया। इसके बाद मुन्नीलाल की तलाश शुरू हुई। न तो वह बिस्तर पर मिले और न ही घर के आसपास।

नहर के पास मिला शव

सुबह जब गांव के लोग सरकारी नहर के पास गए तो बाग में आम के पेड़ के नीचे मुंशीलाल का शव पड़ा मिला। मुंशीलाल ने अपनी शर्ट और गमछे को जोड़कर फांसी का फंदा तैयार किया था। इसके बाद शरीर के भार से गमछा टूट गया और वह जमीन पर गिर पड़े थे।

जैसे ही सूचना घर पहुंची खुशियों पर दुखों के काले बादल छा गए। इसके बाद सभी वैवाहिक कार्यक्रम रोक दिए गए। लड़की के घरवालों ने रोना-पीटना शुरू कर दिया। एक तरफ जहां बेटी की विदाई की तैयारी चल रही थी, वहीं पिता की अर्थी तैयारी होने लगी।

सूचना पर पुलिस ने जांच-पड़ताल शुरू की। एसओ काकोरी अनिल कुमार सिंह का कहना है कि मुंशीलाल ने भी शराब पी रखी थी। बारातियों से झगड़ने पर परिवारीजनों ने उसे समझाकर शांत कराया था। इसके बाद सीधे उन्हें कन्यादान के समय आने की बात कही थी। यही बात उन्हें बुरी लग गई और उन्होंने खुदकुशी कर ली।
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कर्ज लेकर की थी शादी की तैयारियां

मुंशीलाल ने बेटी की शादी के लिए रिश्तेदारों व मित्रों से काफी कर्ज ले रख था। लेकिन जब बारातियों से कहासुनी होने पर घरवालों ने भी उसे कन्यादान छोड़कर कार्यक्रम से दूर रहने की बात कही तो वह आहत हो गया।

मुंशीलाल तीन महीने से मानसिक रूप से परेशान था। बारिश की वजह से उसकी गेहूं की फसल बरबाद हो गई थी। उसके बेटे राहुल का एक्सीडेंट हो गया था। उसके इलाज में भी काफी रुपये खर्च हुए थे। बेटी श्रीकांती के अलावा, पारुल, राहुल और प्रांशी से भी मुंशीलाल को काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मानसिक परेशानियां कम नहीं हुईं।

तय समय पर बारात मुंशीलाल के दरवाजे पर नहीं पहुंची तो वह काफी परेशान हो गया। उसने समझा कि उसका होने वाला समधी मुन्नीलाल जान-बूझकर देरी कर रहा है। उसे यह भी आशंका थी कि कहीं दहेज के लिए तो उसे परेशान नहीं किया जा रहा।

इसका जिक्र उसने घर के सदस्योें से किया। जब दस बजे भी बारात नहीं पहुंची तो उसके सब्र का बांध टूट गया। बारात स्वागत से पहले ही उसके मेहमान लौटने लगे तो गुस्सा और भड़क गया था। इस दौरान उसने भी शराब पी ली थी।

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