गेहूं की फसल तबाह होने से सदमे में आए किसान ने खेत में ही जामुन के पेड़ से लटककर फांसी लगा ली। मौसम की मार से खेत में गिरी फसल के दोबारा उठने की उम्मीद नजर न आने से वह काफी परेशान था।
सोमवार दोपहर दो बजे किसान का फंदे में झूलता शव देख पूरे गांव से लेकर प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया। मामला फैजाबाद जिले का है।
मिल्कीपुर तहसील के इनायतनगर थानांतर्गत घुरेहटा गांव के मजरे जहानपुर निवासी 58 वर्षीय शिवकुमार सिंह पुत्र सुग्रीव सिंह के पास कुल ढाई बीघा जमीन है।
इस बार उसने पूरे खेत में गेहूं की फसल बोई थी लेकिन हाल में बेमौसम बारिश व आंधी की मार से फसल जमीन पर गिर गई।
शिवकुमार सप्ताह भर से गेहूं के खेत में ही पूरा समय देता था। सोमवार सुबह नाश्ता करके साइकिल व मोबाइल घर पर छोड़ पैदल गांव के बाहर खेत पर गया। जहां पास के खेत में काम कर रही महिलाओं ने उसे 9:30 बजे से 1 बजे तक खेत में काम करते देखा। फिर वे घर लौट आईं।
गमछे से लटका मिला शव
मगर जब दोबारा दोपहर दो बजे चना व सरसों काटने गईं, तो देखा कि शिवकुमार का शव गमछे के सहारे उसके खेत में लगे जामुन के पेड़ से लटका हुआ है।
यह देख सहमी महिलाएं शोर मचाने लगी तो सूचना पर गांव से लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई।
इस बीच मृतक की पत्नी उषा देवी व उसका छोटा पुत्र सात वर्षीय किशन व 20 वर्षीय बेटी राधा खेत में पहुंच गए। उनका रोते-रोते बुरा हाल था। शिवकुमार की पत्नी उषा देवी का कहना है कि पिछली दो बारिश के बाद फसल गिकर उठ गई थी, लेकिन हाल की बारिश ने बर्बाद कर दिया।
धीरे-धीरे खेत में गिरी की फसल काली पडऩे लगी। पति को उम्मीद थी कि फसल उठ सकती है और गेहूं इतना जरूर होगा कि दोनों बेटों व बेटी का पेट पाल सकें। मगर दो दिन से उम्मीद छोड़ गुमसुम रहने लगे थे लेकिन हम लोगों को जरा भी आभास नहीं हुआ कि वे जान देने जैसा कदम उठा सकते हैं।
बेटी की जून में तय थी शादी
फसल की बर्बादी से आत्महत्या करने वाला किसान अपनी बेटी के हाथ भी पीले न कर सका। उसने सुल्तानपुर जिले के एक गांव में अपनी बेटी राधा की शादी जून में तय कर रखी थी। राधा बीए द्वितीय वर्ष का छात्रा है, उसका रोते-रोते हाल खराब था।
उसने कहा कि पिता जी ने शादी के लिए तैयारी कर रखी थी। दो साल पहले दो बीघा बाग बेचकर कर्ज चुकता करने के बाद कुछ रुपये बचा कर रखे थे लेकिन फसल बर्बाद से शादी का बाकी इंतजाम कैसे होगा, इसे लेकर परेशान थे।
घर जलने पर लिया था कर्ज, अदा करने में बेचा था बाग
शिवकुमार के पास खेती के अलावा कोई आय का साधन न था। चार साल पहले उसके घर में आग लग गई, तो छप्पर का मकान व पूरी गृहस्थी जल गई।
किसी तरह आस्तीकन बाजार स्थित पंजाब नेशनल बैंक से कर्ज लेकर घर बनवाया और जरूरत के सामान खरीदे।
जैसे-तैसे गाड़ी चलने लगी, मगर कर्ज बढ़ता गया। शिवकुमार की पत्नी उषा बताती हैं कि कर्ज चुकता करने के लिए शिवकुमार ने ढाई बीघा खेत को छोड़कर हिस्से की दो बीघे बाग को बेच दिया। इससे मिले धन का कुछ हिस्सा बेटी की शादी व बच्चों की पढ़ाई के लिए बचा रखी थी।
22 वर्षीय अजय कुमार सिंह घर की माली हालत देख कमाने के लिए एक माह पहले गुजरात के सूरत गया था। लेकिन उसे क्या पता कि जिस पिता के अच्छे दिन के लिए वह हाड़तोड़ श्रम कर रहा है, वही फसल की बर्बादी के सदमें से साथ छोड़ जाएंगे।