युवराज दत्त की 1984 में मृत्यु के बाद से राजपरिवार से जुड़े लोग अपने महल के मालिकाना हक से जुड़े अभिलेखों की खोज में लगे रहे। सफलता न मिलने पर 28 अगस्त, 2019 को आरटीआई कार्यकर्ता सिद्धार्थ नारायण के माध्यम से राजपरिवार ने चार याचिकाएं जिलाधिकारी कार्यालय खीरी, मंडलायुक्त कार्यालय, वित्त विभाग एवं राजस्व परिषद को पार्टी बनाते हुए दाखिल कर महल के मूल अभिलेखों से जुड़ी सूचनाएं मांगी।
चारों याचिकाओं को डीएम कार्यालय स्थानांतरित कर दिया गया। फिर 27 मार्च, 2020 को लिखित सूचना मिली कि मूल अभिलेख सीतापुर के उप निबंधक कार्यालय में हो सकते हैं। इसके बाद पांच याचिकाएं आरटीआई उप निबंधक कार्यालय सीतापुर में दायर की गईं और 21 अक्तूबर, 2020 को महल के स्वामित्व से जुड़े मूल अभिलेख राजपरिवार को लोगों को मिल गए।
इससे साबित हुआ कि उपरोक्त संपत्ति की खाता संख्या-5 व मूल खसरा संख्या 359 है। वर्तमान में इसकी बाजार कीमत एक अरब से अधिक आंकी गई है।