लखनऊ। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सिजेरियन प्रसव का मानक पांच से 15 फीसदी है। इसके बावजूद सिजेरियन प्रसव की दर तेजी से बढ़ रही है। संजय गांधी पीजीआई की ओर से एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रसव ऑडिट के अनुसार हर पांच में से चार प्रसव सिजेरियन हुए। इस प्रसव ऑडिट को इंटरनेशनल जर्नल फाॅर हेल्थ क्वालिटी एंड पेशेंट सेफ्टी के अगस्त के अंक में स्थान मिला है।
यह अध्ययन पीजीआई के डाॅ. अनमोल जैन, डाॅ. अशिमा मित्तल और दिल्ली के भगवान महावीर अस्पताल की डाॅ. महविश सुहैब ने किया है। अध्ययन में सितंबर 2023 से फरवरी 2024 के बीच हुए 50 प्रसव को शामिल किया गया। रॉयल कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (आरसीओजी) और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस की ओर से निर्धारित ऑडिट मानकों के आधार पर डेटा एकत्र किया गया। विश्लेषण में देखा गया कि कुल प्रसव में 66 फीसदी इलेक्टिव सिजेरियन, 18 फीसदी सामान्य प्रसव और 16 फीसदी को इमरजेंसी में सिजेरियन प्रसव कराना पड़ा। प्रसव के दाैरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया और ऑडिट के मानकों में स्थिति संतोषजनक मिली।
देश में तेजी से बढ़ रहे सिजेरियन प्रसव के मामले : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-3 की रिपोर्ट के अनुसार सिजेरियन प्रसव का औसत 8.5 फीसदी था जो सर्वे-4 में बढ़कर 17.2 फीसदी पहुंच गया। हाल ही में हुए अध्ययन के मुताबिक सिजेरियन प्रसव के मामलों में साल भर में 16.7 फीसदी का उछाल आया है।
दो तिहाई मामलों में 38 सप्ताह से कम रही गर्भावस्था : अध्ययन में ये भी देखा गया कि दो तिहाई मामलों में गर्भावस्था की अवधि 38 सप्ताह से कम थी। केवल एक तिहाई मामलों में ही गर्भावस्था अवधि 38 सप्ताह या अधिक रही। अध्ययन में पाया गया कि प्रसूताओं की औसत उम्र करीब 29 वर्ष और औसत वजन 63.5 किलोग्राम था।
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क्यों करना पड़ना सिजेरियन प्रसव
कारण एवं उनका प्रतिशत
पूर्व में सिजेरियन प्रसव- 31
भ्रूण का वजन सामान्य से ज्यादा- 15
बांझपन- 15
प्रसव दर्द न होना- 9
बीपी बढ़ना- 12
एक से ज्यादा भ्रूण- 3
भ्रूण के आसपास द्रव्य कम हो जाना- 6
भ्रूण को सही से ऑक्सीजन न मिलना- 9
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कई बार गर्भवती महिला और घरवाले सिजेरियन प्रसव का दबाव बनाते हैं। उनको सिजेरियन प्रसव सुविधाजनक लगता है, लेकिन भविष्य में इसके कई दुष्परिणाम सामने आते हैं। इसकी वजह से महिला को कमजोरी, संक्रमण का खतरा, अगला प्रसव सामान्य होने की संभावना कम होने के साथ ही कई अन्य समस्याएं होने का खतरा रहता है।
- प्रो. सीमा मेहरोत्रा, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, केजीएमयू