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'बाहरी' ही आकर गर्माते हैं अयोध्या, यहां आपस में हिंदू-मुसलमान में कभी तनाव नहीं होता'

Mon, 11 Nov 2019 05:19 PM IST
ishwar ashish अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
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सबीरा बानो - फोटो : amar ujala
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40 बरसों से प्रभु नगरी अयोध्या में सुहागिनों को चूड़ी पहना रहीं सबीरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दूसरे ही दिन पूरे भरोसे के साथ अपनी दुकान खोली। वे बताती हैं कि यहां के बाशिंदों में आपस में कभी भी तनाव के हालात पैदा नहीं होते। बाहर से आने वाले ही माहौल गर्माते हैं।

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हंसते हुए कहती हैं कि नमाज पढ़ने का वक्त है। यूं तो हमें फोटो खिंचाने की अनुमति नहीं, पर आपको (संवाददाता को) दुनिया को यह बताने के लिए फोटो दे रही हूं कि हम अपनी नगरी में पूरी तरह से महफूज हैं।

फैसला आने के दिन उन्होंने दुकान क्यों बंद रखी? उल्टा सवाल करती हैं-क्या हिंदू भाइयों ने शनिवार को दुकानें बंद नहीं रखी थीं। दरअसल एहतियातन सभी की दुकानें बंद करवाई गई थीं। सबीरा बानो 40 बरसों से अयोध्या में सुहागिनों को चूड़ी पहना रही हैं।
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बताती हैं, बेटे समेत परिवार के सभी सदस्य शादी व दूसरे शुभ अवसरों पर घरों में भी चूड़ी पहनाने चले जाते हैं। हमारा कारोबार मुसलमानों से कम और हिन्दुओं की वजह से ज्यादा चलता है। हमारे आसपास मुसलमानों की दुकानें-घर तो न के बराबर हैं, फिर भी कभी कोई भय महसूस नहीं होता। पूरे यकीन के साथ सबीरा बानो कहती हैं, अतीत में यहां जितनी भी घटनाएं हुईं, बाहरियों ने ही उन्हें अंजाम दिया।

'न जाने अयोध्या और यहां के बाशिंदों ने अपनी जिंदगी में कितने ज्वार-भाटा देखे'

अयोध्या के मुख्य बाजार में ही उनकी दुकान और उसके ठीक पीछे सबीरा बानो का घर है। उनके बेटे-बहू बारावफात मनाने पत्नी के मायके सुल्तानपुर गए हैं। सबीरा कहती हैं कि इसका कोई और मतलब नहीं लगाना। अक्सर ही बेटा मीलाद उन नबी के मौके पर अपनी ससुराल जाता रहा है। वे कहती हैं कि न जाने अयोध्या और यहां के बाशिंदों ने अपनी जिंदगी में कितने ज्वार-भाटा देख लिए। आशंकाओं से भरे यह दिन भी उसी तरह से गुजर जाएंगे।
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...ताकि सबसे शांत शहरों में पहचानी जाए अयोध्या

अयोध्या रविवार को अपनी सामान्य चाल में ही दिखी। बाजार खुला। अलबत्ता रास्ते सील होने के कारण भीड़भाड़ कम रही। खड़ाऊं बना रहे नीलकंठ और चिलम बेच रहे संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि अब बहुत हो गया। प्रभु राम से यही आशीर्वाद मांगते हैं कि इस नगरी की पहचान सबसे शांत शहरों में कराएं, ताकि देश-दुनिया के पर्यटक यहां करोड़ों की संख्या में पहुंचे।
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