अयोध्या के मुख्य बाजार में ही उनकी दुकान और उसके ठीक पीछे सबीरा बानो का घर है। उनके बेटे-बहू बारावफात मनाने पत्नी के मायके सुल्तानपुर गए हैं। सबीरा कहती हैं कि इसका कोई और मतलब नहीं लगाना। अक्सर ही बेटा मीलाद उन नबी के मौके पर अपनी ससुराल जाता रहा है। वे कहती हैं कि न जाने अयोध्या और यहां के बाशिंदों ने अपनी जिंदगी में कितने ज्वार-भाटा देख लिए। आशंकाओं से भरे यह दिन भी उसी तरह से गुजर जाएंगे।
अयोध्या रविवार को अपनी सामान्य चाल में ही दिखी। बाजार खुला। अलबत्ता रास्ते सील होने के कारण भीड़भाड़ कम रही। खड़ाऊं बना रहे नीलकंठ और चिलम बेच रहे संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि अब बहुत हो गया। प्रभु राम से यही आशीर्वाद मांगते हैं कि इस नगरी की पहचान सबसे शांत शहरों में कराएं, ताकि देश-दुनिया के पर्यटक यहां करोड़ों की संख्या में पहुंचे।