परिवारीजनों ने बताया कि शिवराम रात का खाना खाने के बाद नियमित रूप से टहलने जाते थे। शुक्रवार रात भी वह टहलने के बहाने घर से निकले और शहीद स्मारक पहुंचकर फांसी लगा ली। शायद उन्हें आशंका थी कि मौत की खबर सुनने के बाद भी परिवार का कोई सदस्य पहचान न करे इसलिए अपना आधार कार्ड साथ ले गए थे।
घर पर था बाइंडिंग का कारखाना, भतीजे को सौंप दिया काम
शिवराम अपने घर पर ही बाइंडिंग का कारखाना चलाते थे। घर से ही वह अच्छा-खासा काम कर लेते थे। उम्र अधिक होने पर वह असहाय हो गए तो सारा काम भतीजे राजेंद्र को सौंप दिया।
बनियान में लिखा था जयश्री की वजह से जान जाएगी
शिवकुमार की बनियान के निचले हिस्से में लिखा था, जयश्री की वजह से जान जाएगी। ऊपर भी जयश्री के नाम से साथ कुछ लिखा है जो अस्पष्ट है। शिवकुमार ने यह खुद लिखा है या किसी और ने उनकी बनियान पर जयश्री का नाम लिख दिया, इसकी जांच की जा रही है।