चीन से 1,700 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से जो स्मार्टफोन आयात हो रहे हैं, वे साइबर एक्सपर्ट्स के सामने नया खतरा बनकर सामने आए हैं।
इनका आईएमईआई नंबर बदला जा सकता है तो वहीं ये किसी निर्धारित ऑपरेटिंग सिस्टम पर भी नहीं चलते।
इस वजह से इन पर नियंत्रण मुश्किल हो गया है और देश की सुरक्षा के लिए ये खतरा बन गए हैं।
साइबर क्राइम कार्यशाला में आए फॉरेंसिक एक्सपर्ट समीर दत्त और नितिन चौहान ने इस संबंध में कई चौंकाने वाले खुलासे किए।
ब्रांडेड मोबाइल फोन भी पहले जहां सिर्फ सिम में 150 नंबर और 20 एसएमएस स्टोर करने की क्षमता रखते थे, आज कई जीबी डाटा स्टोरेज की क्षमता रखते हैं।
इनमें उपयोग हो रहे ऑपरेटिंग सिस्टम भी इतनी विविधता लिए हैं कि विशेषज्ञों को बहुत काम करना पड़ रहा है। इन हालात में तेजी से बढ़ता चीनी मोबाइल फोन का कारोबार साइबर सुरक्षा में अराजकता पैदा कर रहें।
व्हाइट फोन से शुरू होता है सफर
जिस तरह प्रदेश के घरों में पापड़-बड़ियां बनाई जाती हैं उसी तरह चीन में घर-घर में एलसीडी, की-पैड, बैट्री, कवर आदि मोबाइल फोन के उपकरण बनाए जाते हैं।
इन्हें असेंबल करके ‘व्हाइट फोन’ बनाए जाते हैं। व्हाइट फोन, यानी प्रोग्रामिंग के लिए तैयार किए जा चुके फोन। यह सारा काम ऐसे ठेकेदार करवाते हैं, जो नामी ब्रांड के मोबाइल फोन भी बनवाते हैं। ऐसे में वे डिजाइन ब्रांडेड फोन जैसा ही रखने में सक्षम हैं। साथ ही अपनी ओर से 4 सिम स्लॉट, 4 मेमोरी कार्ड स्लॉट जैसे विकल्प भी वे देते हैं।
10 लाख हैं तो लांच कर सकते हैं अपना मोबाइल ब्रांड
ये व्हाइट फोन बिना किसी ऑपरेटिंग सिस्टम के इंस्टॉल कर भारत भेजे जा रहे हैं, जहां 1,700 रुपये किलो के भाव में इन्हें बेचा जाता है।
कारोबारी करीब 10 लाख रुपये का कंसाइनमेंट मंगवाकर यहां मोबाइल फोन कंपनियों को बेच रहे हैं। हालात ये हैं कि आज अगर आपकी जेब में 10 लाख रुपये हैं तो आप भी अपना मोबाइल फोन ब्रांड शुरू कर सकते हैं।
चाइना से आने वाले अधिकतर फोन को हिमाचल प्रदेश के सोलन और दिल्ली में प्रोग्राम किया जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम डाला जाता है। इसके बाद इन्हें मार्केट में 700 रुपये से 18 हजार रुपये प्रति पीस बेचा जाता है।
घटिया क्वालिटी
इन स्मार्टफोन की क्वालिटी घटिया तो है ही, इन्हें ठीक भी नहीं करवाया जा सकता। दरअसल, इन्हें कंप्यूटर से सिंक्रोनाइज कराने के लिए केबल नहीं बनाई जा रही।
ऐसे में जब ये फोन खराब होते हैं तो इन्हें ठीक करवाना टेढ़ी खीर हो जाता है। दूसरी ओर इन्हें बनाने में उपयोग हुआ मैटीरियल भी घटिया क्वालिटी का होता है।
आतंकी खतरा
ये फोन मीडियामैक्स, स्पैक्ट्रम, एमस्टार आदि चिपसैट में बन रहे हैं। देश की एक प्रमुख एंटी टेरेरिस्ट एजेंसी (एक्सपर्ट्स ने उसका नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया) हर महीने जो 50 के करीब मोबाइल फोन जब्त कर रही है, उनमें से 40 यही चीनी फोन हैं। इनमें 30 फोन स्पैक्ट्रम चिप सेट के हैं।
बदल जाते हैं आईएमईआई नंबर
इन फोन में जब खराबी आती है और उसमें सॉफ्टवेयर री-इंस्टॉल किया जाता है तो उनका आईएमईआई नंबर बदलने का ऑप्शन भी आता है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा तीन वर्ष पूर्व की गई सख्ती अब बेकार होती नजर आ रही है। कुछ मोबाइल फोन सुधारने वाले ब्रांडेड फोन का भी आईएमईआई नंबर बदलने लगे हैं, जो एक नया खतरा बन सकता है।