मेट्रो यानी फायदे की सवारी। ये फायदा भी चौतरफा होगा। ईंधन का खर्च में काफी बचत होगी और आने वाले वक्त में जब सड़क पर चलना मुश्किल हो जाएगा तो ये समय से गंतव्य तक पहुंचाएगी।
समय बचाने के साथ शहर के लोगों को प्रदूषण से भी बचाएगी। जाम में वाहन चलाने का तनाव होगा और न दुर्घटना की आशंका। इस तरह शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ रखने में भी मददगार होगी।
डीएमआरसी ने अपनी डीपीआर में यह भी जानकारी दी है कि किस तरह से आने वाले समय में मेट्रो लोगों के लिए हर तरह से फायदेमंद साबित होगी।
मगर इसके लिए जरूरी होगा कि जनता अपने वाहन छोड़ कर इसकी वातानुकूलित बोगियों में चढ़े। डीएमआरसी का सर्वे बताता है कि अगले 25 साल में राजधानी की सड़कों पर यातायात का घनत्व करीब 4 गुना तक बढ़ जाएगा। जिससे समय, ईंधन और धन का खर्च अधिक होगा।
प्रदूषण चरम पर होगा और दुघर्टना का खतरा भी कई गुना बढ़ जाएगा। ऐसे में मेट्रो में सफर करना लोगों के लिए जरूरी हो जाएगा।
नार्थ साउथ कॉरिडोर (अमौसी से मुंशी पुलिया) के लिए यातायात का भी एक सर्वे किया है। जिसमेें पीक ऑवर्स में रूट पर गुजरने वाले ट्रैफिक के घनत्व का मापा गया है।
इसका मानक पीएचपीडीटी यानी पीक ऑवर पीक डायरेक्शन ट्रैफिक है। इसके हिसाब से करीब 13190 यात्री अमौसी से मुंशी पुलिया के बीच यात्रा करते हैं।
2020 तक यह संख्या 20976 तक पहुंच जाएगी। 2025 में पीएचपीडीटी 25890, 2030 में 34955 और 2041 में 44408 होगी। इस हिसाब से सड़क पर यातायात का घनत्व 25 साल बाद चार गुना होगा।
इससे सड़कों पर ट्रैफिक का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक अमौसी से मुंशी पुलिया के बीच कार का खर्च डेढ़ लीटर ईंधन का है।
यह खर्च बाइक के हिसाब से करीब तीन साल बाद बाइक के लिए इस रूट पर 60 रुपए और कार से ईंधन के प्रकार के हिसाब से 120 से 160 रुपए का खर्च आएगा। मगर इसकी जगह जगह मेट्रो का सफर किया जाएगा तो 40 रुपए का ही खर्च होगा।
कहां कितनी होगी बचत
मेट्रो के यात्री की सालाना समय की बचत 100 प्रतिशत
मेट्रो के यात्री की सालाना ईंधन की बचत 80 फीसदी
मेट्रो के यात्री के वाहन की मेंटीनेंस बचत 80 फीसदी
मेट्रो के यात्री की दुर्घटना से होगी बचत 100 फीसदी