लखनऊ। मेट्रो रेल के लिए ऑस्ट्रेलियाई मैथेड से भूमिगत रूट बनाया जाएगा, जिससे लोगों को खोदाई से होने वाली परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
इसके अलावा लागत भी घटेगी। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के जरिये रूट बनाया जाएगा और कट एंड कवर विधि से अंडरग्राउंड स्टेशनों को अति सुरक्षित बनाया जाएगा।
टनल बोरिंग मशीन के ऑस्ट्रेलियाई मैथेड के जरिये रूट बनाया जाएगा। इसको न्यू ऑस्ट्रेलियन टनलिंग मैथेड कहते हैं।
इस व्यवस्था के तहत आम लोगों को सड़कों पर होने वाली खोदाई की मुसीबतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। यही नहीं इससे लागत भी खासी कम हो जाएगी। इसमें केवल एक जगह जहां से रैंप भूमिगत उतरेगा वहीं खोदाई होगी।
इसके बाद टनल बोरिंग मशीन के जरिये आगे सुरंग बनाई जाएगी। यह मशीन जमीन के अंदर करीब साढ़े पांच मीटर के आवृत्त में ऑटोमैटिक तरीके से खोदाई कर देगी। करीब छह मीटर चौड़ी टनल जमीन के अंदर होगी, जिससे मेट्रो गुजरेगी।
कट एंड कवर से दिल्ली में भी बने अंडरग्राउंड स्टेशन
कट एंड कवर एक ऐसा तरीका है, जिसके जरिये भूमिगत स्टेशन बनाए जाएंगे। हुसैनगंज से केडी सिंह बाबू स्टेडियम तक करीब चार किलोमीटर के मार्ग पर सात भूमिगत स्टेशन होंगे, जिनका स्वरूप अर्द्ध गोलाकार होगा।
इनकी दीवारों की मोटाई 80 से 100 सेंटीमीटर के बीच होगी। यही दीवार स्टेशन की स्थायी साइड वॉल होंगी। दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में भी ऐसा ही किया गया है।
कट एंड कवर मैथेड में पांच चरण होते हैं, जिसमें सबसे पहले भूमिगत पाइप लाइनों को हटाने का काम होगा। उसके बाद सपोर्ट वॉल बनेंगी। इसके बाद दीवारों की मजबूती के लिए स्ट्रट्स बनेंगे। इसके बाद में टनल का निर्माण होगा। इस स्ट्रक्चर को बाद में ऊपर से मजबूत किया जाएगा।