किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में जल्दी ही डिजिटल सब्सट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) जांच की सुविधा शुरू होगी।
केजीएमयू प्रशासन के अनुसार इस तकनीक से शरीर के किसी भी अंग, धमनी (आर्टरी), शिरा (वेन) में होने वाली रुकावट को देखा जा सकता है। साथ ही उसे खोला भी जा सकता है।
यही नहीं किसी ट्यूमर से हो रहे रक्तस्राव, मस्तिष्क में विकसित हो रहे किसी ट्यूमर में खून की आपूर्ति को रोकने, सिकुड़ चुकी नसों को खोलने के लिए भी किया जाता है।
इस तकनीक में पहले नस के द्वारा ‘कन्ट्रांस्ट (डाई)’ को डालकर देखा जाता है कि कहां रुकावट है या फिर कहां रक्तस्राव हो रहा है।
इसके बाद कैथेटर के अंदर गाइड वायर डालकर उस जगह तक पहुंच कर रुकावट को हटा दिया जाता है या फिर रक्तस्राव को रोकने के लिए ग्लू आदि डाला जाता है।
अभी तक इस जांच की सुविधा सिर्फ संजय गांधी पीजीआई में ही उपलब्ध है। केजीएमयू ऐसा दूसरा संस्थान होगा जहां ये सुविधा शुरू होगी।
डॉ. लोहिया इंस्टीट्यूट में डीएसए जांच की सुविधा है लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण पूरी तरह से क्रियाशील नहीं है।
केजीएमयू के रेडियो डायग्नोसिस विभाग में डीएसए सुविधा जल्द शुरू होगी। विभाग ने इसका प्रस्ताव बनाकर केजीएमयू प्रशासन को सौंप दिया है।
रेडियो डायग्नोसिस विभाग की हेड प्रो.रागिनी सिंह ने बताया कि इस तकनीक में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती सिर्फनसों और धमनियों की रास्ते ही जाकर इलाज किया जा सकता है। वो चाहे गुर्दे में होने वाली दिक्कत हो या फिर मस्तिष्क में हो रहा रक्तस्राव।