परिवहन निगम के लखनऊ परिक्षेत्र में क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) ने करीब 199 कंडक्टर के पदों पर संविदा कर्मियों की भर्ती की। इनमें पीआरडी जवान, आईटीआई एवं एनसीसी प्रमाण पत्र धारकों को वरीयता दी गई।
साठगांठ से फर्जी प्रमाण पत्र धारक भी संविदा कंडक्टर बन गए, लेकिन इस खेल का खुलासा हुआ। इसकी जांच उच्च अफसरों को सौंपने के बजाय उसी क्षेत्रीय प्रबंधक के अधीनस्थ सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) को सौंप दी, जिसने संविदा पर भर्ती की।
लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक राजीव चौहान की अगुवाई में जनवरी से जून तक कुल 199 संविदा कंडक्टरों की भर्ती की गई। यह भर्ती तीन बार में हुई जिसमें जनवरी में 49, मार्च में 61 और जून में 81 अभ्यर्थियों का चयन हुआ।
सूत्र बताते हैं कि चयनित संविदा कंडक्टरों की फाइनल सूची जारी करने से पहले अभ्यर्थियों के पीआरडी, एनसीसी एवं आईटीआई प्रमाण पत्र की रेंडम तौर पर क्रास चेकिंग नहीं कराई गई। इससे चौतरफा सवाल उठने लगे हैं।
हर बार चयन करके सीधे संविदा कंडक्टर को डिपो का आवंटित कर दिए गए। लेकिन जून में भर्ती हुए 81 संविदा कंडक्टरों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया तो जाली प्रमाण पत्र से संविदा कंडक्टर की नियुक्ति का प्रकरण उजागर हुआ।
जबकि जनवरी में 49 एवं मार्च में 61 भर्ती हुए संविदा कंडक्टरों के प्रमाण पत्र की जांच ही नहीं कराई गई। परिवहन मंत्री ने जांच का आदेश दिया तो क्षेत्रीय प्रबंधक के अधीन डिपो के एआरएम कैसरबाग राम लवट ने इस प्रकरण की जांच शुरू की।
जांच का आलम यह कि अब तक खुलासा नहीं हो सका कि कुल कितने अभ्यर्थी जाली प्रमाण पत्र से कंडक्टर बने। इस संबंध में क्षेत्रीय प्रबंधक चौहान से बातचीत नहीं हो सकी पर एआरएम रामलवट ने बताया कि प्रकरण की जांच चल रही है।