राज्य उपभोक्ता आयोग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) पर करीब 98 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। एसबीआई को जहां फर्जी एकाउंट में ट्रांसफर हुए 50 लाख रुपये वापस करने होंगे, वहीं 12 प्रतिशत की दर से छह साल के ब्याज के करीब 48 लाख रुपये भी चुकाने होंगे।
यूपी को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड ने राज्य उपभोक्ता आयोग में एसबीआई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि 50 लाख रुपये के उसके खोए ड्राफ्ट का भुगतान नहीं करने के निर्देश के बाद भी बैंक ने भुगतान कर दिया। शिकायत के मुताबिक वर्ष 2009 में देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर, महराजगंज में धान और गेहूं की खरीद के लिए पैसा भेजा जाना था। नौ अप्रैल को अकाउंट पेई डिमांड ड्राफ्ट एसबीआई लखनऊ के माध्यम से पडरौना सहित कई जगह भेजे गए।
पडरौना के लिए भेजा गया 50 लाख रुपये का ड्राफ्ट गोरखपुर से कुशीनगर के बीच कहीं गुम हो गया। इसकी सूचना 15 अप्रैल को एसबीआई पडरौना के ब्रांच मैनेजर को दे दी गई। लोकसभा चुनाव के चलते तीन दिन की छुट्टी की वजह से 18 अप्रैल को बैंक को स्टॉप पेमेंट का लेटर रिसीव करा दिया गया। इसके बाद भी 30 अप्रैल को भुगतान कर दिया गया।
डिमांड ड्राफ्ट यूपी को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड के डिस्ट्रिक्ट परचेज एकाउंट के नाम देय था, जबकि इसे यूपी को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड बरगदवा गोरखपुर में रामप्रसाद अस्थाना के नाम से पूर्वांचल ग्रामीण बैंक में खुले फर्जी एकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया।