प्रदेश में 238.22 लाख किसान हैं। इनमें करीब 93 फीसदी लघु एवं सीमांत किसान हैं। प्रदेश सरकार बिजली और डीजल की कृषि क्षेत्र में खपत कम करने, पर्यावरण प्रदूषण बचाने और किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी के तहत बिजली कनेक्शन को कम करके सोलर पंप को सिंचाई व्यवस्था में शामिल किया जा रहा है। दो हार्स पॉवर से लेकर 10 हार्स पॉवर तक के सोलर पंपों द्वारा सिंचाई करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभी तक सोलर पंप पर 60 फीसदी अनुदान दिया जाता है। अब इसे बढ़ाने की तैयारी है।
किसानों को खुद करनी होगी बोरिंग
कृषि विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार किया गया है कि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा उत्थान महाअभियान (पीए कुसुम)योजना के तहत सोलर पंप लगवाने वाले लघु एवं सीमांत किसानों को कुल लागत का 90 फीसदी और बड़े किसानों को 80 फीसदी तक अनुदान दिया जाए। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। सोलर पंप लगवाने वाले किसानों को बोरिंग खुद करानी होगी। मोटर, सोलर पैनल आदि योजना के तहत तय की गई वेंडर कंपनी से लगवाया जाएगा। दो हार्स पॉवर के सोलर पंप पर करीब 1.80 लाख और पांच हार्स पावर के पंप पर करीब 4.80 लाख का खर्च आता है।
45 हजार से अधिक का लक्ष्य
प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा उत्थान महाअभियान (पीएम कुसुम)योजना के तहत वर्ष 2017-18 से वर्ष 2024-25 तक 79,516 सोलर पंप लगवाए गए हैं। वर्ष 2025-26 के लिए 45 हजार सोलर पंप लगाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में 70 फीसदी भूमि की सिंचाई भूजल के माध्यम से की जाती है।