विश्व हिंदू परिषद का दावा है कि सरकार की रोक के बावजूद परिक्रमा हो गई। तो सपा सरकार व उसकी मशीनरी ने दावा किया है उसने परिक्रमा नहीं होने दी। पर असलियत तो यह है कि परिक्रमा पर वर्चस्व की इस लड़ाई में न कोई जीता और न कोई हारा।
विहिप व संघ परिवार और सपा की सरकार, दोनों अपने-अपने मकसद में कामयाब रहे। धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के सहारे सपा सरकार ने अपनी मुस्लिम हितैषी छवि को धार दे दी।
तो संघ परिवार को मंदिर मुद्दे के ताप की थाह मिल गई। यह संतोष हो गया कि इस मुद्दे के सहारे वह भगवा खेमे की हवा बना सकती है।
विहिप की घोषणा के मुताबिक परिक्रमा 13 सितंबर तक चलनी है। जाहिर है कि अयोध्या पर सियासत का सिलसिला न रुकने वाला है और न थमने वाला।
दोनों पक्षों की कोशिश होगी कि इन 20 दिनों में यूपी की सियासत पर मंदिर व अयोध्या का असर लंबे समय तक बनाए रखने का माहौल तैयार कर लिया जाए।
जिसकी शुरुआत विहिप की तरफ से सरकार के रुख के खिलाफ सोमवार से देशव्यापी धरना-प्रदर्शन के आह्वान के साथ हो गई है।
संघ परिवार जब अयोध्या व मंदिर पर धरना-प्रदर्शन के जरिये समाजवादी सरकार पर हमला बोलेगा तो जवाब में सपा को भी संघ परिवार पर हमला करने का मौका मिलेगा। साफ है कि दोनों खेमे इस मुद्दे के जरिये सियासी संघर्ष को अपने बीच समेटने जुट गए हैं।
पहले ही लिखी जा चुकी थी पटकथा
रविवार को लखनऊ से लेकर अयोध्या व मखौड़ा तक जिस तरह पूरा घटनाक्रम चला। सभी जगह जिस तरह लोग निकले, नारेबाजी की। अयोध्या में विहिप व संतों को सरयू तट तक जाने दिया गया।
विहिप की तरफ से सुरक्षा बलों को छकाते हुए संतों के सरयू के तट पर पहुंचकर पूजा करने का दावा। अयोध्या से मखौड़ा तक कई स्थानों पर सुरक्षा बलों व भगवा खेमे की टोलियों के बीच लुकाछिपी।
सुरक्षा बलों के साथ हल्की-फुल्की धक्का-मुक्की और फिर सामने लगी बसों में गिरफ्तारी देने के नारे के साथ सवारी।
उससे यह बात साफ हो गई कि परिक्रमा पर संघ व सपा सरकार के बीच लड़ाई का तरीका और नतीजा दोनों तय था। पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी। आज तो उस पटकथा का सिर्फ मंचन होना था। भूमिकाएं भी तय थीं और डायलॉग भी। वही हुआ।
मालूम थे दांव व चाल
दावा तो दोनों तरफ से गोपनीयता का हो रहा था। पर, दोनों पक्षों को एक-दूसरे की चाल मालूम थी। शायद यही वजह रही कि जो सिंहल 1991 में सरकार की तमाम सख्ती के बावजूद अयोध्या पहुंचने में कामयाब रहे थे।
वही सिंहल इस बार बाकायदा इस सूचना के साथ लखनऊ पहुंचे कि अमुक समय वह हवाई जहाज से लखनऊ की धरती पर उतरेंगे। वह उतरे और तैयार पटकथा के मुताबिक, अधिकारियों ने उन्हें हवाई अड्डे पर रोका।
सिंहल के साथ श्रीमद् रामभद्राचार्य भी थे। दोनों लोगों को हवाई अड्डे पर बैठाया गया। इन लोगों ने सरकार पर हमला बोला। फोटो खिंचे गए। सिंहल ने छोड़ने व गिरफ्तारी देने की जिद की।
प्रशासन ने सिंहल को कानपुर मार्ग पर नवाबगंज (उन्नाव) पक्षी बिहार पहुंचाकर घोषणा की कि उन्हें हिरासत में रखा गया। श्रीरामभद्राचार्य को दूसरे स्थान पर ले जाया गया।
सिंहल ने नवाबगंज में फिर पत्रकारों से बातचीत की। मुलायम सिंह यादव और उनकी सरकार को भला बुरा कहा। सोमवार से पूरे देश में आंदोलन का ऐलान किया।
इसी के साथ मुलायम व सपा को भी मिल गया भगवा खेमे का विरोध करके अपनी मुस्लिम हितैषी छवि को निखारने का अच्छा और लंबा मौका।