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अब मिड-डे मील का कढ़ी चावल खा 82 बच्चे पड़े बीमार

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राजधानी में एक बार फिर मिड-डे मील ने बच्चों की जान सांसत में डाल दी। बुधवार को चिनहट के प्राथमिक विद्यालय जुग्गौर-1, जुग्गौर-2 और पूर्व माध्यमिक  विद्यालय जुग्गौर में मिड-डे मील में परोसा गया कढ़ी-चावल खाकर 82 बच्चे बीमार पड़ गए।
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पेट दर्द और उल्टी शुरू होते ही बच्चों को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और फिर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। देर शाम तक 12 बच्चों को छोड़कर सभी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इससे पहले 29 जुलाई को मिड-डे मील में परोसे गए दूध को पीकर 80 बच्चे बीमार पड़ गए थे।

अक्षयपात्र संस्था ने तीनों विद्यालयों में सुबह करीब 9.30 बजे मिड-डे मील कढ़ी-चावल पहुंचाया। स्कूलों का कहना है कि करीब 10.30 बजे बच्चों को खाना दिया गया। बच्चों का कहना है कि कढ़ी-चावल में पेंट जैसी बदबू आ रही थी। टीचर को बताया तो उन्होंने कहा कि चुपचाप खाना खाओ। खाने के दौरान ही कुछ बच्चे बीमार पड़ने लगे।
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कुछ देर में ही पेट दर्द और उल्टी की शिकायत करने वालों की संख्या बढ़ने लगी तो स्कूल प्रशासन के हाथ-पांव फूले। बच्चों को आनन-फानन में पास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

70 से अधिक बच्चों को वापस घर भेज दिया गया

बच्चों की संख्या बढ़ने लगी तो एंबुलेंस बुलाकर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। लोहिया अस्पताल में हालात यह हो गए कि एक स्ट्रेचर पर दस से पंद्रह बच्चों को एक साथ बैठाकर इलाज किया जा रहा था।

कुछ गंभीर बच्चों को खाली बेड पर भर्ती कराया गया तो 50 से अधिक बच्चों को अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में शिफ्ट किया गया। करीब दो बजे के बाद 70 से अधिक बच्चों को अस्पताल की एम्बुलेंस से उनके घर भेजा गया।

ग्रामीणों ने स्कूलों को घेरा, शिक्षकों को बनाया बंधक
बच्चों के बीमार पड़ने की सूचना पर ग्रामीणों ने तीनों स्कूलों को घेर लिया। शिक्षक-शिक्षिकाओं को स्कूल के अंदर बंधक बना लिया। बच्चों की हालत देखकर महिलाओं ने रोना शुरू कर दिया।

ग्रामीणों ने शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ मारपीट भी की। कुर्सी और मेजें तोड़ दीं। हंगामे और तोड़-फोड़ की सूचना पर मौके पर चार थानों की पुलिस मौके पर पहुंची।  अस्पताल से बच्चे छुट्टी पाकर गांव पहुंचने लगे तभी  ग्रामीणों ने शिक्षकों को आजाद किया।
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शिक्षिका बोलीं- चखा था खाना

प्राथमिक विद्यालय जुग्गौर-1 की प्रधानाचार्या मंजू श्रीवास्तव, प्राथमिक विद्यालय जुग्गौर-2 की  प्रधानाचार्या रेनू श्रीवास्तव और पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रभारी प्रधानाचार्या विमला सक्सेना के अनुसार अक्षयपात्र संस्था ने जो खाना उपलब्ध कराया है वही बच्चों को दिया गया है। बच्चों को खाना देने से पहले शिक्षकों ने चखकर भी देखा था। बच्चों को पेट दर्द या उल्टी कैसे हुई वे नहीं बता सकतीं।

चुनावी फायदे के लिए लगी होड़
मिड डे मील खाने के बाद बच्चे बीमार पड़े तो प्रधान चुनाव के संभावित प्रत्याशी मौका नहीं चूके। संभावित प्रधान प्रत्याशियों ने अपनी-अपनी गाड़ी स्कूल के बाहर बच्चों को अस्पताल पहुंचाने के लिए लगा दीं। इस दौरान अपनी गाड़ी में बिठाने की होड़ लगी रही। यहां तक कि बहुत से बच्चों को घरों से बुलाकर गाड़ी पर बिठाकर अस्पताल पहुंचाया गया।

फिर नहीं बंटा मिड डे मील में दूध
राज्य सरकार द्वारा आठवीं तक  के स्कूलों में हर बुधवार को कोफ्ता चावल के साथ 200 मिलीलीटर दूध बांटने का आदेश दिया गया है। इसके बावजूद बुधवार को खाने के साथ बच्चों को दूध नहीं दिया गया। अक्षयपात्र संस्था के साथ ही दूसरी एनजीओ ने भी ज्यादातर स्कूलों में दूध उपलब्ध नहीं कराया।

ज्यादातर को अस्पताल से छुट्टी
मामले पर जिला बेसिक शिक्षाधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने कहा कि बच्चों के बीमार होने की सूचना पर खंड शिक्षा अधिकारी को भेजा गया था। शिक्षकों का कहना था कि खाना देने से पहले उन्होंने खुद चखा था। इसके बावजूद बच्चों की तबियत कैसे खराब हुई यह जांच के बाद ही कहा जा सकता है। अस्पताल से 12 बच्चों को छोड़कर ज्यादातर को तुरंत छुट्टी दे दी गई थी। खाने का सैंपल ले लिया गया है। जांच के बाद स्थिति साफ होगी।
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