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जमीन घोटाले के मामले में दो दिन बाद तहसीलदार को हटाया

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सीतापुर। बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास को लेकर खरीदी गई जमीन में लाखों के घोटाले के मामले में तहसीलदार बिसवां को डीएम शीतल वर्मा ने हटा दिया है। डीएम ने बिसवां तहसीलदार नीरज पटेल को सिधौली तहसीलदार के पद पर नई तैनाती देते हुए सिटी मजिस्ट्रेट हर्षदेव पांडेय को मामले की जांच सौंपी है। इसके अलावा सिधौली तहसीलदार का तबादला महोली करते हुए महोली तहसीलदार को सीतापुर का न्यायिक तहसीलदार बनाया गया है।
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दो दिन पहले जिला योजना समिति की बैठक में सेवता विधायक ज्ञान तिवारी की ओर से जमीन घोटाले का मामला प्रभारी मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के सामने उठाया गया था। जमीन बेचने वाले किसान लालजी व रामअधार ने प्रभारी मंत्री को बताया था कि खरीदे जाते समय डेढ़ लाख रुपये बीघा की अदायगी तय हुई थी, जबकि उन्हें अब 60 हजार बीघा ही मिल रहे हैं। इसमें तहसीलदार बिसवां को दोषी बताया गया था। नाराज प्रभारी मंत्री ने तहसीलदार बिसवां नीरज पटेल को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए उनके खिलाफ केस दर्ज कराने के निर्देश डीएम शीतल वर्मा को दिए। इसके साथ प्रभारी मंत्री ने दस दिनों में मामले की जांच कर डीएम से रिपोर्ट भी तलब की है। डीएम शीतल वर्मा ने जमीन घोटाले के मामले में तहसीलदार नीरज पटेल को हटाते हुए सिटी मजिस्ट्रेट हर्षदेव पांडेय को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। हालांकि नीरज पटेल को सिधौली तहसीलदार के रूप में नई तैनाती भी दे दी गई है। वहीं, सिधौली तहसीलदार सर्वरीश मिश्र का तबादला महोली करते हुए महोली तहसीलदार अभिमन्यु वर्मा को सीतापुर का न्यायिक तहसीलदार बनाया गया है।

अभी तक नहीं दर्ज हुआ केस
सूबे की कैबिनेट मंत्री व जिले की प्रभारी मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने शिकायत पर तहसीलदार बिसवां को तत्काल हटाने पर उनके खिलाफ केस दर्ज कराते हुए दस दिनों में जांच रिपोर्ट तलब की थी। प्रभारी मंत्री के निर्देश के बाद तहसीलदार को हटाने में डीएम को दो दिन लग गए। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ अभी तक केस भी दर्ज नही कराया गया है। प्रभारी मंत्री के निर्देश डीएम के लिए कितना मायने रखते हैं। इसकी तस्दीक डीएम द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट को जांच अधिकारी नियुक्त करने से होती है। दरअसल, प्रभारी मंत्री ने जांच डीएम को करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट को जांच सौंप दी।
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हास्यास्पद कार्रवाई
डीएम की ओर से की जाने वाली यह कार्रवाई बेहद हास्यास्पद है। भ्रष्टाचार में लिप्त अफसर का सिर्फ तबादला किया जाना भला कार्रवाई कैसे हुई। तबादला तो एक निश्चित प्रक्रिया है। किसानों के बयान और कई अन्य साक्ष्यों के सामने आने पर भी भ्रष्टाचार करने वाले अफसर को अभयदान देना सरकार की मंशा पर कुठाराघात करने के समान है।
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-ज्ञान तिवारी, विधायक सेवता
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